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डीके शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट जुलाई में करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट जुलाई में डीके शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की सुनवाई करेगा. CBI ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, हाई कोर्ट ने जांच को 3 महीने में पूरा करने को कहा था.

Telangana News, Supreme Court, OBC Reservation
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट जुलाई में सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि डीके शिवकुमार एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति है.

उन्होंने कहा भ्र्ष्टाचार का स्पष्ट मामला बनता है. सत्ता का दुर्भावनापूर्ण प्रयोग यहां एक मुद्दा है. वही शिवकुमार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह मामला अधिकार क्षेत्र का है, रिट याचिका को गैर अनूरक्षणीय माना गया है. सुप्रीम कोर्ट डीके शिवकुमार की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमे उन्होंने हाई कोर्ट के 19 अक्टूबर 2023 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. बता दें कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने 10 फरवरी को शिव कुमार के खिलाफ भ्र्ष्टाचार के एक मामले में सीबीआई की कार्यवाही पर रोक लगा दिया थी.

कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में दी बड़ी राहत

बता दें कि डीके शिवकुमार ने इससे पहले सीबीआई केस को रद्द करवाने के लिए कर्नाटक हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जिसपर सुनवाई के बाद हाइकोर्ट ने राहत देने से इंकार कर दिया था. हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ डीके शिवकुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. हाइकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि डीके शिवकुमार के खिलाफ दर्ज भ्र्ष्टाचार के मामले की जांच 3 महीने में पूरा करने को कहा था.

ज्ञात हो गया सीबीआई ने आरोप लगाया है कि डीके शिवकुमार ने 2013 से 2018 के बीच कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते हुए अपने ज्ञात आय के स्रोतों से इतर बेतहाशा संपत्ति हासिल कर ली. सीबीआई ने मामले में 3 सितंबर 2020 को केस दर्ज किया था. वही डीके शिवकुमार ने इस मामले को 2021 में चुनौती दी थी.

गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी राहत देते हुए डीके शिवकुमार के खिलाफ 2018 में दर्ज मामले को रद्द कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि शिव कुमार PMLA के तहत शुरू की गई कार्यवाही कानून और नियम सम्मत नही होने से रद्द किया जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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