सुप्रीम कोर्ट ने CLAT 2025 के परिणामों को लेकर विभिन्न हाईकोट्स में दायर याचिकाओं को दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है. यह याचिका राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के संघ की ओर से दायर की गई थी. सीजेआई संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ ने आदेश दिया कि अन्य हाईकोर्ट्स से रिकॉर्ड 7 दिनों के भीतर दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित किए जाएं. दिसंबर 2024 में आयोजित CLAT 2025 परीक्षा के परिणामों के खिलाफ वर्तमान में दिल्ली हाई कोर्ट, कर्नाटक हाई कोर्ट, झारखंड हाई कोर्ट, राजस्थान हाई कोर्ट, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में याचिकाएं लंबित है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि CLAT 2025 में कई सवाल गलत थे. परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों ने 5 प्रश्नों के उत्तर के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 के उत्तरों में बदलाव करवाए थे, लेकिन 3 में बदलाव नहीं हुए थे. पिछली सुनवाई में सीजेआई ने कहा था कि अलग-अलग हाई कोर्ट में लंबित रिट याचिका को एक ही हाई कोर्ट में निपटाया जाना चाहिए. क्योंकि इससे जल्द सुनवाई होगी.
दिल्ली हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
कोर्ट ने संकेत दिया था कि मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया जा सकता है. पीठ ने कहा था कि जब सवाल और जवाब स्पष्ट रूप से गलत हो तो अदालते हस्तक्षेप करेगी. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा था कि आप किस हाई कोर्ट का सुझाव देंगे? एसजी ने कर्नाटक हाई कोर्ट का सुझाव दिया था. जिसपर सीजेआई ने कहा था कि नही, क्योंकि पहली याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दायर हुई थी.
सीजेआई ने कहा था कि हमने पहले भी अनुच्छेद 32 के तहत याचिका खारिज कर दी है, हम इसे हाई कोर्ट को भेजेंगे. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि कई याचिकाएं है, कुछ में सवाल अलग-अलग है, मेल नही खाते. याचिका में सामान्य विधि प्रवेश परीक्षा 2025 के परिणामों के खिलाफ दायर याचिकाओं को विभिन्न हाईकोट्स से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी. याचिका अधिवक्ता प्रीता श्रीकुमार अय्यर के माध्यम से दायर की गई थी.
सिंगल बेंच का फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने 20 दिसंबर 2024 को आंसर-की में गलतियों को लेकर कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज को CLAT 2025 के रिजल्ट को संशोधित करने का निर्देश दिया था. सिंगल बेंच ने ये फैसला एक अभ्यर्थी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया था और माना था कि प्रवेश परीक्षा में दो प्रश्नों के उत्तर गलत थे.
अदालत ने कहा था कि त्रुटियां स्पष्ट थी और उनपर आंखे मूंद लेना अन्याय होगा. याचिका में कंसोर्टियम द्वारा 7 दिसंबर 2024 को प्रकाशित उत्तर कुंजी को चुनौती दी गई थी, तथा कुछ प्रश्नों के सही उत्तर घोषित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था. 24 दिसंबर 2024 को एकल पीठ के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने कहा था प्रथम दृष्टया दोनों प्रश्नों पर एकल पीठ के आदेश में कोई त्रुटि नही नजर आ रही है. कोर्ट ने सीएनएलयू न्यायधीश के निर्णय के अनुसार परिणाम घोषित करने को कहा था.
-भारत एक्सप्रेस
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