Urdu Conclave 2026

पत्रकारों-यूट्यूबर्स की एंट्री पर रोक के सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, जल्द सुनवाई की मांग

उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले सर्कुलर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग की गई है.

Supreme Court- bharat express

उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने को लेकर जारी सरकारी सर्कुलर्स के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की गई है. याचिकाकर्ता के वकील नरेंद्र मिश्रा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख (मेंशन) करते हुए त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया. इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिका दायर करें, हम सुनवाई करेंगे. वकील द्वारा यह बताए जाने पर कि याचिका पहले ही औपचारिक रूप से दायर हो चुकी है, अदालत ने कहा कि वे इस पर विचार करेंगे.

दोनों राज्यों के सर्कुलर रद्द करने की मांग

दायर याचिका में उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार द्वारा जारी इन प्रशासनिक आदेशों को पूरी तरह रद्द करने की मांग की गई है. इस याचिका में केंद्र सरकार सहित देश के सभी राज्यों को पक्षकार बनाया गया है. याचिका में तर्क दिया गया है कि राज्य सरकारों के इन प्रतिबंधात्मक आदेशों से नागरिकों को संविधान के तहत मिले कई मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन होता है:

  • अनुच्छेद 14: समानता का अधिकार
  • अनुच्छेद 19(1)(a): अभिव्यक्ति और विचार की स्वतंत्रता का अधिकार
  • अनुच्छेद 19(1)(g): पेशा, व्यवसाय या आजीविका अपनाने का अधिकार
  • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
  • अनुच्छेद 21(A): शिक्षा का अधिकार
  • पत्रकारों, यूट्यूबरों और सिविल सोसाइटी की एंट्री पर रोक

राज्यों द्वारा जारी किए गए सर्कुलर्स के माध्यम से सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स (YouTubers), सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों के बिना पूर्व प्रशासनिक अनुमति के परिसर में प्रवेश करने, शूटिंग करने या अन्य गतिविधियां संचालित करने पर रोक लगाई गई है. सर्कुलर के तहत बिना पूर्व सक्षम अनुमति के:

  • फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी
  • छात्रों या शिक्षकों का इंटरव्यू
  • ऑडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर लाइव-स्ट्रीमिंग पूरी तरह प्रतिबंधित की गई है.

छात्रों की सुरक्षा और निजता की रक्षा

दूसरी ओर, राज्य सरकारों और प्रशासन की ओर से इन कड़े नियमों को लागू करने के पीछे मुख्य रूप से स्कूली बच्चों की सुरक्षा, अनुशासन और निजता (Privacy) का हवाला दिया गया है.

प्रशासन का कहना है कि स्कूलों में बाहरी लोगों द्वारा की जाने वाली अनधिकृत व अनियंत्रित रिकॉर्डिंग और कवरेज से बच्चों की गोपनीयता और गरिमा प्रभावित होती है, जिससे शैक्षणिक माहौल भी बाधित होता है. इसी प्रशासनिक व्यवस्था को अब सुप्रीम कोर्ट में कानूनी तौर पर चुनौती दी गई है.

जारी किए थे दिशा-निर्देश

उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त को राजस्थान शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे. जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि किसी भी व्यक्ति या मीडियाकर्मी को छात्रों या स्कूल की गतिविधियों से जुड़ी फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग करनी है, तो इसके लिए संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल (प्रधानाचार्य) या संस्था प्रधान से पहले अनिवार्य रूप से विधिवत अनुमति लेनी होगी.



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