Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

1996 के बहुचर्चित प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे संतोष सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका

सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के बहुचर्चित प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे संतोष सिंह की पैरोल अवधि बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी है.

1996 के बहुचर्चित प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे संतोष सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस प्रशांत मिश्रा की पीठ ने पैरोल की अवधि को बढ़ाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिल्ली हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि वे पहले ही 25 साल जेल में बिता चुके है. उन्होंने कहा कि समय पूर्व रिहाई की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित याचिका पर जल्द सुनवाई का आदेश दिया जाए. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप कह रहे हैं कि मामला दिल्ली हाई कोर्ट में 18 मई को सूचीबद्ध है. हम हाई कोर्ट से अनुरोध करते हैं और याचिका का जल्द से जल्द निपटारा करें. साथ ही कोर्ट ने संतोष सिंह की पैरोल की अवधि को बढ़ाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने संतोष सिंह को यह स्वतंत्रता दी कि वह हाई कोर्ट से अपने मामले की जल्द सुनवाई की मांग कर सकते है.

ओपन जेल में सजा काट रहे संतोष सिंह

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ऐसी मांग की जाती है, तो हाई कोर्ट मामले के तथ्यों को देखते हुए उस पर विचार करे. खासकर यह देखते हुए कि घटना 23 जनवरी 1996 की है और याचिकाकर्ता करीब 31 साल जेल में है, जिसमें रिमिशन की अवधि शामिल है. याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी बताया कि संतोष सिंह ओपन जेल की सजा काट रहे है, जहां उन्हें रोजाना सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक काम के लिए बाहर जाने की अनुमति है. 19 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट ने संतोष सिंह को समर्पण करने का आदेश दिया था, और कहा था कि जब तक वह आत्मसपर्ण नही करेगा, तब तक समय पूर्व रिहाई की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कोर्ट नही करेगा.

दिल्ली हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने समय पूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था. जिसके खिलाफ डिवीजन बेंच में याचिका दायर की है. संतोष कुमार सिंह ने 1996 में कानून की छात्रा प्रियदर्शिनी मट्टू से दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी. संतोष कुमार सिंह ने द्वारा दायर याचिका में दिल्ली के कारागारों के सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) द्वारा 21 अक्टूबर 2021 को हुई समीक्षा बैठक में की गई सिफारिश को रद्द करने की मांग किया गया था.

बता दें कि संतोष कुमार सिंह ने 1999 में निचली अदालत ने बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ मृतका के परिजनों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसपर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2006 को रेप और हत्या का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई था. जिस फैसले के खिलाफ संतोष कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर सभी पक्षों की जिरह के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2010 में संतोष कुमार सिंह की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए, फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया था.

यह भी पढ़े: पंजाब के रूपनगर रेंज के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज; CJI बोले- ‘हमें कुछ कहने पर मजबूर न करें’

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital