सुप्रीम कोर्ट ने रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार पंजाब के रूपनगर रेंज के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को राहत देने से इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने हरचरण सिंह भुल्लर की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया है.
हालांकि कोर्ट ने भुल्लर को यह छूट दी है कि यदि ट्रायल कोर्ट दो महीने के भीतर ट्रायल शुरू नही करता है तो, वह पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर सकते हैं. भुल्लर को पिछले साल भी सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा था. कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि इस स्टेज पर दखल नही दे सकता.
सीबीआई द्वारा दर्ज केस रद्द करने की मांग
सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हमें कुछ कहने पर मजबूर मत कीजिए. आप पहले से वही है, आपके पास वकीलों की पूरी फौज है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा था कि पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में मामला लंबित है, वहां अपनी बात रखें. जिसपर भुल्लर के वकील ने कहा था कि हाई कोर्ट ने जनवरी की तारीख लगा रखी है. लिहाजा अंतरिम राहत दी जाए, लेकिन कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया था. भुल्लर का कहना था कि पंजाब में सीबीआई को केस दर्ज करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी है, लेकिन बिना मंजूरी के ही सीबीआई ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. इसलिए सीबीआई जांच का अधिकार नही है. लिहाजा सीबीआई द्वारा दर्ज मुकदमे को रद्द किया जाए.
शिकायत के अनुसार भुल्लर ने कारोबारी के खिलाफ एक फर्जी मुकदमा दर्ज किया था और उसे खत्म करने के लिए 8 लाख रुपये की मांग की थी. सीबीआई ने 16 अक्टूबर को इस मामले में बिचौलिए कृष्णु शारदा के साथ भुल्लर को गिरफ्तार किया था. वह मंडी गोविंदगढ़ के एक कारोबारी से रिश्वत मांग रहे थे.
इस मामले में सीबीआई भुल्लर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. गिरफ्तारी के 13 दिन बाद भुल्लर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज हुआ था.
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-भारत एक्सप्रेस
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