सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता सुरेश गोपी की अपील पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यह नोटिस जारी किया है और त्रिशुर के उस वोटर से जवाब मांगा है, जिसने गोपी के चुनाव को चुनौती दी थी.
केरल हाई कोर्ट ने केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी के खिलाफ त्रिशुर के मतदाता और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के नेता बिनॉय ए. एस की चुनावी याचिका को सुनवाई योग्य माना था. हालांकि केरल हाई कोर्ट ने सब्जी बाजार के विक्रेताओं को छाते बांटने से जुड़े आरोप को रिकॉर्ड को हटाते हुए कहा था कि बाकी भ्रष्ट आचरण के आरोपों पर मुकदमा चलेगा.
बिनॉय ए. एस ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सुरेश गोपी, उनके चुनाव एजेंट और सहयोगियों ने जलप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 123 के तहत भ्रष्ट चुनावी आचरण किया. याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर मतदाताओं से समर्थन मांगा गया और मोबाइल फोन जैसे उपहार देने का वादा किया गया.
सोशल मीडिया के कुछ वीडियो का हवाला देते हुए यह भी आरोप लगाया गया है मतदाताओं को धन संबंधी प्रलोभन दिए गए. दायर याचिका में आरोप भी लगाया गया है कि सुरेश गोपी के चुनाव प्रचार से जुड़े एक प्रचारक ने मतदाताओं से वोट डालते समय हिंदू देवी देवताओं का स्मरण करने की अपील की और भगवान राम से जुड़े धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया.
हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
सुरेश गोपी ने इन आरोपों को सुनवाई के शुरुआती चरण में नही खारिज करने की मांग की थी, लेकिन केरल हाई कोर्ट ने उनकी प्रारंभिक आपत्तियां स्वीकार नही की. अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर केरल हाई कोर्ट के उस फैसले और चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज न किए जाने के आदेश को चुनौती दी है.
गोपी ने केरल में जीत दिलाकर इतिहास रच दिया. यहां सात दशकों से भी अधिक लंबे समय से पार्टी जीत हासिल करने में नाकामयाब रही थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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