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तमिलनाडु के मदुरै स्थित तिरुपरमकुंडम पहाड़ी पर मौजूद दीपथुन पर कार्तिकेय दीप जलाने के मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, मांगा जवाब

तिरुपरमकुंडम पहाड़ी पर दीपथुन पर कार्तिकेय दीप जलाने के फैसले के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा है.

तमिलनाडु के मदुरै स्थित तिरुपरमकुंडम पहाड़ी पर मौजूद दीपथुन पर कार्तिकेय दीप जलाने को लेकर दिए गए फैसले के बाद हुए प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह जनहित याचिका वकील जी. एस. मणि ने दायर की है. जिसमें आरोप लगाया गया है कि जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ जाति और धर्म के आधार पर अपमानजनक टिप्पणियां की गई, जिसका मकसद सामाजिक सद्भाव को बिगड़ना और कानून व्यवस्था और साम्प्रदादिक अशांति फैलाना है.

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि हम इस मामले की जांच करेंगे, फिलहाल हम नोटिस जारी नही करेंगे. उनकी एकमात्र शिकायत यह है कि उनके खिलाफ आदेश पारित करने वाले न्यायाधीश को बख्शा नही जा सकता. वे मदुरै के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का प्रयास कर रहे हैं और इस संबंध में उन्होंने रिप्रजेंटेशन पेश किए है.

जज के इस्तीफे की उठी मांग

दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सत्ताधारी डीएमके समर्थित पार्टियों, जिसमें कम्युनिस्ट पार्टियां भी शामिल है. उससे जुड़े व्यक्तियों ने कुछ वकीलों के.साथ मिलकर सार्वजनिक स्थानों पर अवैध और अनाधिकृत विरोध प्रदर्शन किए और मद्रास हाईकोर्ट और मदुरै हाई कोर्ट सहित अन्य कोर्ट के बाहर बार-बार प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक जज के इस्तीफे की मांग की. क्योंकि जज पर गलत इरादे से न्यायिक फैसला देने का आरोप लगाया गया है. आरोप यह भी है कि राज्य सरकार और पुलिस अधिकारी निष्क्रिय रहे और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहे.

जस्टिस स्वामीनाथन ने रखी अपनी बात

दीपम विवाद में फैसला देने वाले और डीएमके की ओर से संसद में महाभियोग का सामना करने वाले मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस जी. आर स्वामीनाथन ने कहा कि वे अपने बाकी कार्यकाल में सनातन धर्म को दिल के करीब रखेंगे. जस्टिस स्वामीनाथन ने दिसंबर 2025 को एक फैसला दिया था कि मंदिर की परंपरा के अनुसार ऊपर वाले दीपथुन पर दीया जलाया जाए. उन्होंने मंदिर कमिटी को आदेश दिया कि ऐसा करें और अगर नहीं तो याचिकाकर्ता खुद 10 लोगों के साथ सीआईएसएफ यानी सुरक्षा बल की मदद से दिया जला सकते है.

ये भी पढ़ें:दिल्ली हाई कोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में दोषी यासीन मलिक को देरी से याचिका दायर करने पर मांगा जवाब

-भारत एक्सप्रेस



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