ध्रुपद गायक उस्ताद फैयाज वसीफुद्दीन डागर ने फिल्म पोनैनीयिन पोन्नियिन सेलवन ii के गीत ‘वीरा राजा वीरा’ से जुड़े कॉपीराइट को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. दायर याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है. कोर्ट 13 फरवरी को दायर याचिका पर सुनवाई करेगा.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सिंगल जज ने इस आधार पर गलती की कि यदि किसी रचना को कोई कलाकार प्रस्तुत करता है तो उसे ही उसका संगीतकार मान लिया जाए. अगर हम इसे मान ले तो हमें कॉपीराइट एक्ट में कंपोजर की परिभाषा ही बदलनी होगी.
कॉपीराइट अधिनियम की व्याख्या पर आपत्ति
डागर की याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कॉपीराइट कानून में ‘फिक्सेशन’ (कार्य का किसी भौतिक रूप में दर्ज होना) की अनिवार्यता को लेकर स्थापित कानूनी स्थिति की अनदेखी की.
इसके अलावा, डागर ने कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 55(2) की व्याख्या पर भी आपत्ति जताई है. यह धारा कहती है कि यदि किसी प्रकाशित कृति के साथ किसी व्यक्ति का नाम जुड़ा है, तो उसे उसका लेखक माना जाएगा, जब तक कि इसके विपरीत प्रमाण न हो.
वीरा राजा वीरा गाने की धुन पर विवाद
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित उस्ताद फैयाजुद्दीन वसीफुद्दीन डागर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि वीरा राजा वीरा गाने की धुन उनके पिता उस्ताद नासिर फैयाजुद्दीन डागर और चाचा द्वारा उस्ताद नासिर जाहिरूद्दीनडागर द्वारा रचित शिवा स्तुति से कॉपी की गई है.
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डागर ने दावा किया कि भले ही गाने के बोल अलग है, लेकिन इसका संगीतमय ढांचा, लय और बीट्स शिवा स्तुति से पूरी तरह मिलते-जुलते है. हालांकि एआर रहमान ने आरोपों से इनकार कर दिया है. एआर रहमान ने कहा कि शिव स्तुति ध्रुपद शैदी के अंदर के ट्रेडिशनल कम्पोजीशन है, जो पब्लिक डोमेन का हिस्सा है.
-भारत एक्सप्रेस
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