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ममता सरकार की बढ़ी मुश्किलें; बकाया DA पर सुप्रीम कोर्ट में 3 मई को अहम सुनवाई, अवमानना याचिका पर टिकी नजरें

सुप्रीम कोर्ट 3 मई को पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ महंगाई भत्ता (डीए) भुगतान न करने पर दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करेगा. इससे पहले कोर्ट ने 2008 से 2019 तक के बकाया डीए का भुगतान करने का आदेश दिया था.

महंगाई भत्ता को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 3 मई को सुनवाई करेगा. पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कर्मचारियों का बकाया डीए नही दिया है. जिसके खिलाफ कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दायर किया है.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर का बकाया डीए को देने का आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश से राज्य के 20 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को इसका लाभ मिलेगा. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पीके मिश्रा की बेंच ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया था कि 2008 से 2019 तक कि अवधि का बकाया डीए का भुगतान किया जाना चाहिए. कोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य को 31 मार्च तक क्षेत्र सहित डीए का 25 फीसदी हिस्सा भुगतान करना होगा. शेष बकाया डीए का भुगतान 15 मई तक किया जाना चाहिए.

महंगाई भत्ता कर्मचारियों का कानूनी अधिकार- सुप्रीम कोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए सरकारी कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया था. राज्य सरकार ने उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुप्रीम कोर्ट ने बकाया राशि का भुगतान की निगरानी के लिए पूर्व जस्टिस इंदू मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय कमेटी का गठत किया है. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार है और इसे फंड की कमी का हवाला देकर नही रोका जा सकता है. पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों को करीब 18 फीसदी डीए मिलता है.

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पेश बजट में सरकार ने 4 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाया था. राज्य सरकार के कर्मचारियों के एक वर्ग ने केंद्रीय दरों और महंगाई भत्ते की बकाया की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जिसपर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 20 मई 2022 को राज्य के कर्मचारियों को केंद्र के समान 31 प्रतिशत की दर से डीए का भुगतान करने का आदेश दिया था.

हाई कोर्ट में राज्य सरकार कर्मचारियों परिसंघ, एकता मंच और सरकारी कर्मचारी परिषद की जीत हुई. राज्य इस आदेश को 3 नवंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. राज्य सरकार के कर्मचारियों ने केंद्र की दरों पर डीए की मांग की है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों को फिलहाल 53 प्रतिशत की दर से डीए मिल रहा है. इसलिए डीए में अंतर फिलहाल 35 प्रतिशत होगा.

बता दें कि इस मामले में दिसंबर में आखिरी सुनवाई हुई थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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