पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (डीए) से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को राज्य सरकार के कर्मचारियों को 25% महंगाई भत्ता देने का आदेश दिया था दे. इस फैसले से लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लाभ मिलने की उम्मीद हैं.
हाईकोर्ट में केंद्र की दरों पर डीए की मांग
पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों को करीब 18 फीसदी डीए मिलता है. हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पेश बजट में सरकार ने 4 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाया था. राज्य सरकार के कर्मचारियों के एक वर्ग ने केंद्रीय दरों और महंगाई भत्ते की बकाया की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जिस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 20 मई 2022 को राज्य के कर्मचारियों को केंद्र के समान 31 प्रतिशत की दर से डीए का भुगतान करने का आदेश दिया था.
हाई कोर्ट में राज्य सरकार कर्मचारियों परिसंघ, एकता मंच और सरकारी कर्मचारी परिषद की जीत हुई. राज्य इस आदेश को 3 नवंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. राज्य सरकार के कर्मचारियों ने केंद्र की दरों पर डीए की मांग की है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों को फिलहाल 53 प्रतिशत की दर से डीए मिल रहा है. इसलिए डीए में अंतर फिलहाल 35 प्रतिशत होगा. बता दें कि इस मामले में दिसंबर में आखिरी सुनवाई हुई थी. 2022 से अभी तक 18 बार सुनवाई टल चुकी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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