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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद व्हाट्सएप-मेटा बैकफुट पर, CCI के निर्देश मानने को तैयार; जानें आपको कैसे मिली राहत

WhatsApp Meta Privacy Policy: सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद मेटा-व्हाट्सएप ने यू-टर्न लिया है. वे CCI के निर्देश मानने को तैयार हो गई हैं, 16 मार्च तक यूजर्स की प्राइवेसी सुरक्षा लागू करेंगे. डेटा शेयरिंग पर सख्ती होगी.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद मेटा और व्हाट्सएप बैकफुट पर आ गए हैं. कंपनी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि वह प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के निर्देशों का पालन करेगी. यूजर्स के डेटा शेयरिंग पर सहमति और प्राइवेसी सुरक्षा के उपाय 16 मार्च 2026 तक लागू कर दिए जाएंगे.

मामले की शुरुआत और CCI का फैसला

यह विवाद व्हाट्सएप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी से शुरू हुआ. इस पॉलिसी में यूजर्स का डेटा मेटा की दूसरी कंपनियों के साथ शेयर करने की बात थी. सीसीआई ने इसे प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन माना. नवंबर 2024 में कंपनी पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया. आरोप था कि व्हाट्सएप ने अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग किया और यूजर्स को नई पॉलिसी मानने के लिए मजबूर किया. यूजर्स के पास असली विकल्प नहीं था.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले क्‍या कहा था

3 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मेटा और व्हाट्सएप को कड़ी नसीहत दी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि डेटा शेयरिंग के नाम पर नागरिकों की निजता से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि व्हाट्सएप संवैधानिक मूल्यों का मजाक बना रहा है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पूछा कि यूजर्स को ऑप्ट-आउट का अधिकार कैसे पता चलेगा. अखबार के विज्ञापन कौन पढ़ता है. कोर्ट ने चिंता जताई कि आम लोग नियम-शर्तें नहीं समझ पाते. कोई भी कंपनी नागरिकों के अधिकारों की कीमत पर नहीं चल सकती.

आज की सुनवाई और कंपनी का यू-टर्न

23 फरवरी 2026 को सुनवाई हुई. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि कंपनी सीसीआई के निर्देशों का पालन करेगी. एनसीएलएटी के दिसंबर 2025 के फैसले के अनुसार सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे. कंपनी ने हलफनामा दाखिल किया जिसमें डेटा शेयरिंग की पूरी जानकारी दी गई. सिब्बल ने कहा कि अब अंतरिम रोक की जरूरत नहीं. कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दी. मेटा को सीसीआई के सामने अनुपालन का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया.

यूजर्स के लिए SC के फैसले का मतलब

इस फैसले से भारतीय यूजर्स को फायदा होगा. उनका डेटा बिना सहमति के शेयर नहीं किया जा सकेगा. प्राइवेसी बेहतर तरीके से सुरक्षित रहेगी. कंपनी को यूजर्स को स्पष्ट विकल्प देने होंगे. कोर्ट ने साफ कहा कि एक भी डेटा बिना सुरक्षा के शेयर नहीं होगा. यह फैसला बिग टेक कंपनियों के लिए सबक है.

आगे क्या होगा

मुख्य मामला अभी लंबित है. 16 मार्च तक अनुपालन की रिपोर्ट आएगी. कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए तारीख तय की है. यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर कोर्ट सख्त रुख अपनाए हुए है.

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-भारत एक्सप्रेस



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