बटला हाउस बुलडोजर की कार्रवाई का सामना कर रही एक विधवा इशरत जहां की दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने महिला की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद डीडीए को यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है.
जस्टिस हरीश वैधनाथन शंकर की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने डीडीए को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब देने को कहा है. उसके जवाब के बाद याचिकाकर्ता एक सप्ताह में जवाबी जवाब दाखिल करेंगी. इशरत जहां ने बुलडोजर की कार्रवाई के खिलाफ यह याचिका दायर की है. कोर्ट 10 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. याचिका में डीडीए द्वारा 26 मई को जारी ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती दी है.
महिला की संपत्ति बटला हाउस, जामिया नगर खासरा नंबर 283 से संबंधित है. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में 115 निवासियों ने याचिका दायर कर सिंचाई विभाग को मुरादी रोड़, खिजर बाबा कॉलोनी, जामिया नगर, ओखला में खसरा संख्या 277 में स्थित उनकी संबंधित संपत्तियों को ध्वस्त करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की थी. उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा बटला हाउस इलाके में कई दुकानों और मकानों पर अवैध निर्माण को लेकर नोटिस चस्पा किया था और 5 जून तक खाली करने को कहा था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है.
याचिका में कहा गया है कि बटला हाउस के मुरादी रोड़ पर करीब 50 से 60 साल पुरानी बस्ती है. जिसपर कार्रवाई के लिए नोटिस चस्पा किया गया है. दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इन इलाकों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर चुकी है. डीडीए ने बटला हाउस के मुरादी रोड़ पर अपना दावा ठोका था, और मामला डीडीए का दावा है कि खसरा नंबर 279 का जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण का है और इस पर अवैध तरीके से घर बने हैं.
डीडीए द्वारा चस्पा किए गए नोटिस में कहा गया है कि सभी मकान 11 जून 2025 तक खाली कर दे, नही तो उसके बाद बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी. जबकि वहां के निवासियों का कहना है कि वह पिछले 50 सालों से वहां रह रहे है और अचानक डीडीए ने अपना दावा थोक दिया है.
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