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‘मोटापे की गिरफ्त में हमारे बच्चे’… सरकार का मास्टरस्ट्रोक: स्कूलों के पास अब सिर्फ मिलेगा पौष्टिक खाना

FSSAI Junk Food Ban: FSSAI स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, बर्गर और अन्य जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है. इसका मकसद बच्चों को मोटापे और अस्वास्थ्यकर खान-पान से बचाना है.

स्कूलों के बाहर जंक फूड बिक्री पर प्रतिबंध

(AI IMAGE)

FSSAI Junk Food Ban: देश में बच्चों में बढ़ते मोटापे और अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में अधिक वसा, चीनी और नमक (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है.

FSSAI का यह प्रस्तावित नियम भारत में स्कूली बच्चों के खान-पान के माहौल को बदलने के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है. चिली जैसे विदेशी देशों की तर्ज पर उठाया जा रहा यह कदम बच्चों को कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों से बचाने और स्वस्थ भारत की नींव रखने का एक ठोस प्रयास है.

50 मीटर के दायरे में जंक फूड पर कसता शिकंजा

FSSAI के नए मसौदे के अनुसार, स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में स्थित दुकानों, ठेलों और रेस्तरां में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, समोसे, बर्गर, पिज्जा, नूडल्स और चॉकलेट जैसे उत्पादों की आसानी से उपलब्धता पर रोक लगाई जाएगी. इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की पहुंच से हानिकारक वसा, अतिरिक्त चीनी और ज्यादा नमक वाले खान-पान को दूर रखना और उन्हें सेहतमंद खाद्य पदार्थों की ओर प्रेरित करना है.

बच्चों में बढ़ता मोटापा बनी मुख्य वजह

भारत में 5 से 19 वर्ष की आयु के बच्चों में मोटापे की समस्या तेजी से विकराल रूप ले रही है. आंकड़े बताते हैं कि 2015 में जहां लगभग 2.8 करोड़ बच्चे अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 4.1 करोड़ हो गई. अनुमान है कि 2040 तक यह आंकड़ा 5.6 करोड़ तक पहुंच सकता है. सस्ते पैकेटबंद स्नैक्स, मीठे पेय और उनके आकर्षक विज्ञापनों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है.

छोटे विक्रेताओं और कंपनियों पर पड़ेगा असर

FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी के मुताबिक, इस कदम से न केवल बच्चों में अच्छी आदतें विकसित होंगी बल्कि खाद्य कंपनियां भी अपने उत्पादों में चीनी और नमक की मात्रा घटाने पर मजबूर होंगी. हालांकि, इस फैसले का सीधा असर स्कूलों के आसपास स्थित किराना दुकानों, रेस्तरां और स्ट्रीट वेंडर्स की कमाई पर पड़ेगा, जिससे उन्हें अपने उत्पाद बदलने पड़ सकते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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