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खर्राटे बन सकते हैं हार्टअटैक की वजह, जानें कैसे डॉक्टरों ने बचाई 10 साल के मासूम की जान

मेरठ के मेडिकल कॉलेज में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 10 साल के एक बच्चे के खर्राटों ने उसकी जान जोखिम में डाल दी. टॉन्सिल्स बढ़ने की वजह से बच्चे के दिल के वाल्व खराब होने लगे थे और उसे वेंटिलेटर तक पर रखना पड़ा.

Snoring Risk Heart Attack
Edited by Vaibhav Gupta

अक्सर हमारे घरों में जब कोई खर्राटे लेता है, तो उसे गहरी नींद की निशानी मान लिया जाता है या फिर हंसी-मजाक में टाल दिया जाता है. लेकिन मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. इस मामले ने ये साबित कर दिया कि खर्राटे लेना कोई मामूली बात नहीं, बल्कि जानलेवा बीमारी का संकेत हो सकता है. यहां एक 10 साल के मासूम बच्चे की जान सिर्फ इसलिए खतरे में पड़ गई क्योंकि उसके खर्राटों ने उसके दिल पर सीधा हमला बोल दिया.

छोटी नजरअंदाजी बनी बड़ी मुसीबत

दरअसल, इस बच्चे की समस्या की शुरुआत सामान्य खर्राटों से हुई थी, जिसे परिवार ने शुरुआत में गंभीरता से नहीं लिया. धीरे-धीरे बच्चे की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी. जब मामला मेडिकल कॉलेज पहुंचा, तो जांच में जो सच सामने आया वो डराने वाला था.

डॉक्टरों ने पाया कि बच्चे के टॉन्सिल्स इतने ज्यादा बढ़ गए थे कि उन्होंने गले का रास्ता लगभग पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था. हालत यह थी कि सोते समय बच्चे का दम घुटने लगता था और इसी खिंचाव और दबाव की वजह से उसके दिल के वाल्व खराब होने शुरू हो गए थे.

कैसे पहुंचा वेंटिलेटरप तक

कार्डियोलॉजी विभाग की डॉक्टर मुनेश तोमर और नाक-कान-गला विशेषज्ञों की टीम ने जब बच्चे की जांच की, तो स्थिति काफी गंभीर थी. बच्चा रात भर सो नहीं पाता था और जैसे ही उसकी आंख लगती, वह अपने ही खर्राटों की आवाज से घबराकर जाग जाता था.

शरीर में ऑक्सीजन की कमी और दिल पर पड़ रहे एक्स्ट्रा प्रेशर की वजह से उसे वेंटिलेटर तक पर रखना पड़ा. डॉक्टरों ने बिना देरी किए ऑपरेशन का फैसला लिया और एक सफल सर्जरी के जरिए उसके बढ़े हुए टॉन्सिल्स को हटाकर गले का रास्ता साफ किया. आज वह बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन यह घटना एक बड़ा सबक छोड़ गई है.

आखिर क्यों आते है खर्राटे?

डॉक्टर्स का कहना है कि जब हम खर्राटे लेते हैं, तो असल में हमारी सांस की नली में रुकावट आ रही होती है. इसकी वजह से फेफड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और दिल को शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है. अगर यह सिलसिला लंबे समय तक चले, तो हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

खासकर बच्चों में अगर खर्राटों की समस्या दिख रही है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें. यह सिर्फ नींद की कमी नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाली दिल की बीमारियों की दस्तक हो सकती है. इसलिए अगली बार जब घर में कोई खर्राटे ले, तो उसे मजाक में उड़ाने के बजाय किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह जरूर लें, क्योंकि समय पर लिया गया फैसला किसी की जिंदगी बचा सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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