सेकेंडरी कैरीज क्या है? (AI IMAGE)
Teeth Cavity Causes: अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर एक बार दांत में कैविटी होने पर फिलिंग करा ली, तो वह दांत हमेशा के लिए सुरक्षित हो गया. लेकिन कुछ समय बाद उसी दांत में फिर से सड़न होने लगती है. डॉक्टरी भाषा में इसे ‘सेकेंडरी कैरीज’ या ‘रिकरेंट कैरीज’ कहा जाता है.
अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि डॉक्टर ने इलाज खराब किया था. दरअसल, फिलिंग दांत के खराब हिस्से को ठीक करती है, लेकिन वह कैविटी के खिलाफ कोई जीवनभर का सुरक्षा कवच नहीं बनाती.
कैसे हो जाती है दोबारा कैविटी?
फिलिंग के किनारों पर प्लाक जमा होना: जहां दांत और फिलिंग आपस में मिलते हैं, उस जगह को ‘रिस्टोरेशन मार्जिन’ कहते हैं. अगर उस हिस्से की सफाई ठीक से न हो, तो वहां खाना फंसने लगता है और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं.
मीठा और चिपचिपा खाना: केवल मीठा खाना ही नहीं, बल्कि दिन में कितनी बार मीठा खा रहे हैं, यह ज्यादा मायने रखता है. टॉफी, चॉकलेट, बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स दांतों पर चिपके रहते हैं. बैक्टीरिया इस शुगर का इस्तेमाल करके एसिड बनाते हैं, जिससे दांत का इनेमल घुलने लगता है.
पुरानी फिलिंग का घिसना या टूटना: चबाने के भारी दबाव के कारण समय के साथ फिलिंग में दरार आ सकती है या वह घिस सकती है. ऐसे में गैप बन जाता है और अंदर तक दोबारा सड़न पहुंच जाती है.
ओरल हाइजीन और ब्रशिंग की गलतियां: जल्दी-जल्दी ब्रश करना, पीछे के दांतों की सफाई छोड़ देना या फ्लोराइड टूथपेस्ट का इस्तेमाल न करना भी दोबारा कैविटी का कारण बनता है.
कैविटी के जोखिम से कैसे बचें?
दिन में दो बार ब्रश करें: कम से कम दो मिनट तक दांतों के हर कोने की सही से सफाई करें.
खाने के बाद कुल्ला करें: जब भी कुछ मीठा या चिपचिपा खाएं, तुरंत पानी से कुल्ला जरूर करें.
डेंटल चेकअप कराएं: अगर फिलिंग वाले दांत में दर्द हो, खाना फंसे या किनारा खुला लगे, तो तुरंत डेंटिस्ट को दिखाएं. हर बार पूरी फिलिंग बदलना जरूरी नहीं होता, कई बार केवल रिपेयरिंग से भी काम चल जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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