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Dev Deepawali 2025: काशी में गंगा घाटों पर उतरा स्वर्ग, दीपों की रोशनी में नहाई पूरी वाराणसी, देखें खूबसूरत तस्वीरें

देव दीपावली पर इस बार काशी एक नई आभा में चमक उठी. अस्सी से राजघाट तक के घाट दीपों से जगमगा उठे, थ्रीडी शो, राष्ट्रीय थीम और भक्ति से भरे आयोजनों ने इस पर्व को अविस्मरणीय बना दिया.

Dev Deepawali 2025: वाराणसी में देव दीपावली का नजारा इस बार कुछ खास रहा. जब घाटों पर दीपों की हजारों कतारें जलीं, तो लगा मानो धरती पर ही स्वर्ग उतर आया हो. मां गंगा की लहरों पर झिलमिलाते दीपों की रोशनी ने पूरी काशी को दिव्यता से भर दिया. हर घाट, हर मंदिर, हर कोना श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति की अनोखी छटा बिखेरता नजर आया. आईए आपको कुछ खूबसूरत और मंत्रमुग्ध कर देने वाली तस्वीरों से दिखाए कि इस साल देव दिवाली पर कैसा रहा वाराणसी के घाटों का नजारा.

देव दीपावली की इस शाम त्रिपुरासुर पर देवों की विजय का पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावना से भी जुड़ा दिखा. दशाश्वमेध घाट पर अमर जवान ज्योति की प्रतीक ज्योति स्थापित कर कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई. इस बार महोत्सव को ऑपरेशन सिंदूर थीम पर समर्पित किया गया था, जो देश की वीर माताओं को नमन का संदेश देता है.

चेत सिंह घाट पर परंपरा और तकनीक का सुंदर मेल देखने को मिला, जहां 25 मिनट का थ्रीडी प्रोजेक्शन शो काशी-कथा दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया. इसमें भगवान शिव-पार्वती विवाह, भगवान बुद्ध के उपदेश, कबीर और तुलसी की भक्ति परंपरा, और महामना मदन मोहन मालवीय की काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थापना जैसी झलकियां दिखाई गईं.

अस्सी से लेकर राजघाट तक के 88 घाटों पर दीपों और रंगीन लाइटों से ऐसी सजावट हुई कि पूरा क्षेत्र दुल्हन की तरह जगमगा उठा. गंगा महल घाट, रीवा कोठी, दरभंगा महल और चेत सिंह किले की रोशनी देखते ही बनती थी. हर घाट पर अलग-अलग थीम सनातन एकता, नारी सशक्तिकरण और नशा मुक्ति को रंगोली और दीप सजावट से दर्शाया गया.

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और वीआईपी आगमन को देखते हुए वाराणसी को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया. घाटों पर एनडीआरएफ, जल पुलिस और महिला सुरक्षा दल पूरी चौकसी में तैनात रहे. नावों के लिए विशेष लेन बनाई गईं और सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया गया. शहर के ट्रैफिक, पार्किंग और प्रवेश मार्गों पर पूरी तरह नियंत्रण रखा गया ताकि भक्तों को कोई परेशानी न हो.

श्रीकृष्ण लीला का मंचन भी कार्यक्रम का आकर्षण बना रहा. अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के तत्वावधान में कंस वध की लीला का मंचन हुआ और कंस का विशाल पुतला जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया. इस दृश्य को देखने के लिए घाटों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी और हर किसी के चेहरे पर श्रद्धा और उत्साह झलक उठा.

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-भारत एक्सप्रेस



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