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Dussehra 2025: मय दानव, मंदोदरी और मेरठ का क्या है पौराणिक कनेक्शन

मेरठ का नाम मायाराष्ट्र या मयराष्ट्र से उत्पन्न बताया जाता है.अलग-अलग कई ग्रंथों में उल्लेख है कि यह क्षेत्र दानवों और मायावी शक्तियों का निवास रहा है.

Mythological significance of Meerut, Dussehra 2025: उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण शहर मेरठ का नाम मायाराष्ट्र या मयराष्ट्र से उत्पन्न बताया जाता है जो असुरों का महान वास्तुशिल्पी और दैवीय शिल्पकार माना जाता था. स्कन्द पुराण के काशी खण्ड के अनुसार यह क्षेत्र दानव मयासुर (मय दानव) का निवास-क्षेत्र था. मेरठ को साल 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की जन्म स्थली के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से भी मेरठ की अपनी गहरी पहचान है. इसे रावण की ससुराल के रूप में भी जाना जाता है. इसकी जानकारी वाल्मीकि रामायण, स्कंद पुराण तथा स्थानीय दंत कथाओं तक में दर्ज है.मेरठ का महत्त्व केवल ऐतिहासिक-सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि पौराणिक कथाओं के कारण भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है. मंदोदरी की उज्ज्वल छवि और उसकी नीतिपरक चेतावनियों ने इस कथा को और भी जीवंत और सार्थक बना दिया है. आइए, दशहरा के मौके पर जानने का प्रयास करते हैं कि मेरठ कैसे रावण की ससुराल बनी? इसकी पूरी कहानी कहां-कहां, किस-किस रूप में दर्ज है?

Mythological significance of Meerut: मेरठ का नाम मायाराष्ट्र या मयराष्ट्र से उत्पन्न बताया जाता है.अलग-अलग कई ग्रंथों में उल्लेख है कि यह क्षेत्र दानवों और मायावी शक्तियों का निवास रहा है. यहां पर एक समय मय दानव अर्थात् माया दैत्य का राज्य था जो असुरों का महान वास्तुशिल्पी और दैवीय शिल्पकार माना जाता था.

किंवदंतियों के अनुसार, इस स्थान पर कभी मंदोदरी महल और मयासुर गढ़ी जैसे भव्य निर्माण मौजूद थे जिन्हें समय के प्रभाव ने धीरे-धीरे नष्ट कर दिया. यह वही मय दानव था जो असुरों का एक महान वास्तुकार और माया का विशेषज्ञ था. उसका उल्लेख महाभारत के वनपर्व (अध्याय 3) में मिलता है, जहां उसने अर्जुन के लिए मयसभा का निर्माण किया था. रामायण और अन्य पुराणों में उसे मयासुर कहा गया है. जिसने दैत्यों और असुरों के लिए कई नगरों का निर्माण किया.

वाल्मीकि रामायण और अन्य ग्रंथों जैसे स्कंद पुराण, पद्म पुराण, कथा सरित्सागर के अनुसार मय दानव की एक अत्यंत रूपवती पुत्री थी, जिसका नाम मंदोदरी था. अप्सरा हेमा ने मय दानव से विवाह किया और उनकी पुत्री मंदोदरी ने जन्म लिया. मंदोदरी अपने अनुपम सौंदर्य, शील और नीति के लिए ग्रंथों में विख्यात हैं.

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पौराणिक कथओं के अनुसार रावण ने अपनी शक्ति और पराक्रम से मय दानव को प्रभावित किया. इसी कारण मय दानव ने अपनी पुत्री मंदोदरी का विवाह रावण से करवा दिया. वाल्मीकि रामायण के अनुसार मंदोदरी का विवाह मयराष्ट्र अर्थात् वर्तमान मेरठ में भव्य विधि-विधान से सम्पन्न हुआ था.

मंदोदरी, रावण की रानी होने के बावजूद अपनी बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता के लिए जानी जाती हैं. जब रावण ने सीता का अपहरण किया तो मंदोदरी ने उसे रोकने की पूरी कोशिश की. उन्होंने रावण को चेतावनी दी कि यदि वह यह अनर्थ करेगा तो यह उसकी लंका के विनाश का कारण बनेगा. रावण के अंत पर शोक में डूबी मंदोदरी ने राम की नीति और मर्यादा को स्वीकार करते हुए यह बताया कि धर्म का मार्ग ही सत्य होता है.
मान्यताओं के अनुसार मेरठ में मंदोदरी से जुड़े कुछ स्थल माने जाते हैं. मंदोदरी महल और मयासुर किला जैसे स्थानों की चर्चा पुरानी कथाओं में मिलती है. लोक कथाओं में मेरठ का नाम मंदोदरी की जन्मभूमि और रावण की ससुराल रूप में जीवित है. मंदोदरी का मायका मेरठ और विवाह लंका में हुआ इसलिए मेरठ को लोकप्रिय रूप से लंका के रावण की ससुराल कहा जाने लगा.

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-भारत एक्सप्रेस 



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