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Independence Day 2025: 15 अगस्त पर देशभक्ति का करना चाहते हैं अनुभव, तो इन 5 ऐतिहासिक इमारतों पर जरूर करें विजिट

Independence Day 2025: इस बार 15 अगस्त 2025 को शुक्रवार पड़ रहा है, यानी एक लंबा वीकेंड. अगर आप ट्रैवल का प्लान बना रहे हैं, तो इस बार हिल स्टेशन या बीच को छोड़कर भारत की कुछ बेहतरीन ऐतिहासिक जगहों को अपनी ट्रिप में जरूर शामिल कीजिए.

Independence Day

Independence Day 2025: 15 अगस्त जैसे ही करीब आता है, देशभर में लोगों के मन में देशभक्ति की भावना जाग उठती है. यह दिन सिर्फ एक राष्ट्रीय अवकाश नहीं, बल्कि उन वीरों को याद करने का अवसर है जिन्होंने आज़ादी के लिए अपनी जान तक दे दी. लेकिन हम आपको बता दें हमारा इतिहास सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि वो हर ईंट, हर दीवार, उन हवाओं और उन चुपचाप खड़े स्मारकों में दर्ज है, जो बीते ज़माने की गवाही देते हैं. चाहे रानी की वाव की गहराइयों में उतरें या कोणार्क मंदिर के पहियों को देखें, हर जगह आपको अतीत की एक झलक मिलेगी.

आज़ादी का 79वां साल स्वतंत्रता दिवस अपने साथ एक खास मौके ला रहा है. आपको बता दें इस बार 15 अगस्त 2025 को शुक्रवार पड़ रहा है, यानी एक लंबा वीकेंड. अगर आप ट्रैवल का प्लान बना रहे हैं, तो इस बार हिल स्टेशन या बीच को छोड़कर भारत की कुछ बेहतरीन ऐतिहासिक जगहों को अपनी ट्रिप में जरूर शामिल कीजिए. अगर आपको भी असल भारत को करीब से देखना और जानना है तो ये जगह जरूर जाएं.

पिंक सिटी जयपुर रंगों, इतिहास और परंपराओं से भरपूर शहर है. हवा महल यहां का प्रमुख आकर्षण है, जो अपनी खूबसूरत झरोखों और राजस्थानी वास्तुकला के लिए मशहूर है. आमेर किला, सिटी पैलेस और जंतर मंतर जैसी जगहें इस शहर को और भी खास बनाती हैं. लोकल मार्केट में घूमते हुए पारंपरिक वस्त्र, हस्तशिल्प और आभूषण खरीदना भी एक अनुभव है. दिल्ली से सड़क मार्ग से सिर्फ 5-6 घंटे की दूरी पर, यह एक परफेक्ट वीकेंड डेस्टिनेशन है.

भोपाल से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित सांची, बौद्ध संस्कृति का जीता-जागता प्रतीक है. तीसरी सदी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया सांची स्तूप जीवन, मृत्यु और मोक्ष के धम्मचक्र का प्रतीक है. इसके चारों ओर बने तोरण द्वारों पर बुद्ध की जातक कथाएं उकेरी गई हैं. यहां का अशोक स्तंभ और चार सिंह वाला राष्ट्रीय प्रतीक देखने लायक है.

ओडिशा के समुद्री किनारे स्थित कोणार्क मंदिर एक अद्भुत स्थापत्य है जो कला, विज्ञान और अध्यात्म का संगम प्रस्तुत करता है. इसे 13वीं शताब्दी में गंगा वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया था. मंदिर की दीवारों पर सूर्य उपासना से जुड़ी नक्काशियां आज भी वैसी की वैसी मौजूद हैं. इसके 12 विशाल पहिए धूपघड़ी के रूप में कार्य करते हैं, जो दिन के अलग-अलग समय को दर्शाते हैं.

गुजरात के पाटन में स्थित रानी की वाव एक शानदार बावड़ी है जिसे 11वीं सदी में रानी उदयमती ने अपने पति राजा भीमदेव की स्मृति में बनवाया था. यह बावड़ी सात स्तरों में बनी है और इसकी दीवारों पर भगवान विष्णु के दस अवतार, अप्सराएं और योगिनियों की बारीक नक्काशी है. सबसे नीचे भगवान विष्णु की वह मूर्ति है जो शेषनाग के फनों पर विश्राम करते दिखाई देते हैं. यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित यह स्थल वास्तुकला और भक्ति का अनुपम मेल है.

कोलकाता का विक्टोरिया मेमोरियल ब्रिटिश काल की यादों को संजोए हुए एक भव्य स्मारक है. इसे 1901 में लॉर्ड कर्जन ने महारानी विक्टोरिया की याद में बनवाया था और 1921 में इसका निर्माण पूरा हुआ. सफेद संगमरमर से बनी यह इमारत एक महल जैसी प्रतीत होती है. यहां की गैलरियों में पेंटिंग्स, हथियार और शाही धरोहर रखी गई हैं. सबसे विशेष है इसकी छत पर लगी कांस्य की 'विक्ट्री' मूर्ति, जो हवा के साथ घूमती है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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