Aaj Ka Panchang 13 May 2025: 13 मई 2025 को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी. इस दिन विशाखा नक्षत्र और वरीघा योग का संयोग होगा. शुभ मुहूर्त की बात करें तो मंगलवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:36 तक रहेगा. राहुकाल दोपहर 15:25 से 17:03 तक रहेगा. चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे.
हिंदू पंचांग, जिसे वैदिक पंचांग भी कहते हैं, समय और काल की सटीक गणना के लिए उपयोग किया जाता है. पंचांग में पांच अंग होते हैं: तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण. दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य-चंद्र की स्थिति, हिंदू मास और पक्ष आदि की जानकारी मिलती है.
पंचांग विवरण:
13 मई 2025 को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात 24:35 तक रहेगी. विशाखा नक्षत्र सुबह 09:02 तक और वरीघा योग सुबह 05:45 तक रहेगा. प्रथम करण बालवा सुबह 11:31 तक और द्वितीय करण कौवाला रात 24:35 तक रहेगा. मंगलवार को सूर्योदय सुबह 05:39 और सूर्यास्त शाम 18:41 पर होगा. चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करेगा. राहुकाल दोपहर 15:25 से 17:03 तक रहेगा. विक्रमी संवत् 2082 और शक संवत् 1947 (विश्वावसु) है. अभिजीत शुभ मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:36 तक रहेगा.
पंचांग के पांच अंग:
1. तिथि:
हिंदू काल गणना में चंद्र रेखांक के सूर्य रेखांक से 12 अंश आगे जाने का समय तिथि कहलाता है. एक माह में 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष में बंटी होती हैं. शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या होती है.
तिथियों के नाम: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या/पूर्णिमा.
2. नक्षत्र:
आकाश मंडल में तारों का समूह नक्षत्र कहलाता है. कुल 27 नक्षत्र होते हैं, जिनका स्वामित्व नौ ग्रहों को मिला है. नक्षत्रों के नाम: अश्विन, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती.
3. वार:
सप्ताह के सात दिन वार कहलाते हैं, जो ग्रहों के नाम पर हैं: सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार.
4. योग:
सूर्य और चंद्र की विशेष दूरी से बनने वाले 27 योग होते हैं. योगों के नाम: विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र, वैधृति.
5. करण:
एक तिथि में दो करण होते हैं—पूर्वार्ध और उत्तरार्ध में. कुल 11 करण हैं: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग, किस्तुघ्न. विष्टि करण को भद्रा कहते हैं, जिसमें शुभ कार्य वर्जित हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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