Banke Bihari Charan Darshan on Akshaya Tritiya: ब्रज की पावन धरा और ठाकुर बांके बिहारी के मंदिर में आज श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ा है. मौका है अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya 2026) का, जो बांके बिहारी मंदिर के सबसे खास उत्सवों में से एक माना जाता है. बता दें कि इस दिन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरे वर्ष वस्त्रों और श्रृंगार से ढके रहने वाले ठाकुर जी के ‘श्री चरणों’ के दर्शन भक्तों को केवल आज के ही दिन प्राप्त होते हैं. मान्यता है कि आज के दिन बांके बिहारी के चरणों के दर्शन करने मात्र से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
क्यों साल में केवल एक बार होते हैं चरण दर्शन?(Banke Bihari Charan Darshan)
दरअसल बांके बिहारी जी के चरणों को साल भर ढके रखने के पीछे एक प्राचीन और चमत्कारिक कथा प्रचलित है. करीब 500 साल पहले स्वामी हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न होकर ठाकुर जी निधिवन में प्रकट हुए थे. कथा के अनुसार, जब स्वामी जी को ठाकुर जी की सेवा और भोग के लिए आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, तब बांके बिहारी जी ने स्वयं उनकी मदद की.
स्वामी जी जब भी सुबह उठते, उन्हें ठाकुर जी के चरणों के पास एक स्वर्ण मुद्रा प्राप्त होती थी. इसी मुद्रा से वे प्रभु की सेवा का प्रबंध करते थे. चरणों से स्वर्ण मुद्रा मिलने के इसी रहस्य के कारण स्वामी जी ने प्रभु के चरणों को हमेशा के लिए ढक दिया, ताकि यह चमत्कार गुप्त रहे. तभी से केवल अक्षय तृतीया पर ही चरणों को सार्वजनिक दर्शन (Banke Bihari Charan Darshan) के लिए खोला जाता है.
गर्मी से शीतलता के लिए विशेष भोग और राग सेवा
अक्षय तृतीया का पर्व गर्मियों की शुरुआत का प्रतीक भी है, इसलिए आज ठाकुर जी को विशेष शीतल भोग अर्पित किए जाते हैं. मंदिर के सेवायत पुजारी श्रीनाथ गोस्वामी के अनुसार, इस दिन बांके बिहारी जी को गर्मी से राहत देने के लिए कई तरह के शरबत, आंवले का मुरब्बा, आम का रस (आम्र पन्ना) और शीतल व्यंजनों का भोग लगाया जाता है. इसके अलावा, आज के दिन ठाकुर जी का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें चंदन का लेप भी लगाया जाता है, ताकि उन्हें शीतलता प्राप्त हो सके.
चंदन लेप और सर्वांग दर्शन की परंपरा(Akshaya Tritiya Seva)
चरण दर्शन के साथ-साथ आज ठाकुर जी के सर्वांग दर्शन (पूरे विग्रह के दर्शन) भी होते हैं. अक्षय तृतीया पर बांके बिहारी जी को विशेष रूप से चंदन के वस्त्र और चंदन का लेप धारण कराया जाता है. ब्रज में मान्यता है कि आज के दिन ठाकुर जी पूरी तरह से ‘शीतल’ मुद्रा में होते हैं. मंदिर में इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु वृंदावन पहुँचते हैं. भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं.
श्रद्धालुओं की अरदास और अटूट आस्था
बांके बिहारी मंदिर में हर दिन उत्सव जैसा माहौल होता है, लेकिन अक्षय तृतीया की ‘अक्षय’ मान्यता इसे सबसे अलग बनाती है. भक्त अपनी मनौतियां लेकर आते हैं और जब उनकी मुराद पूरी होती है, तो वे अपनी श्रद्धा अनुसार छप्पन भोग और पोशाकें अर्पित करते हैं. आज के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है. वहीं मंदिर के आसपास और पूरे वृंदावन में आज ‘जय बिहारी जी की’ के जयघोष गुंजायमान हैं, क्योंकि भक्त साल के इस सबसे दुर्लभ क्षण को अपनी आंखों में बसाने के लिए घंटों कतारों में खड़े रहते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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