CR Park Durga Puja: दिल्ली के ‘मिनी बंगाल’ यानी चितरंजन पार्क (CR Park) में नवरात्रि की रौनक इस समय अपने चरम पर है. जब भी राजधानी में पारंपरिक और भव्य दुर्गा पूजा की बात होती है, तो सीआर पार्क का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है. इस बार इस इलाके के सबसे बड़े और मशहूर मेला ग्राउंड पूजा समिति ने अपने गौरवशाली इतिहास के 51 वर्ष यानी गोल्डन जुबली पूरे कर लिए हैं.
बता दें इस ऐतिहासिक मौके पर मेला ग्राउंड में एक बार फिर दिल्ली का सबसे बड़ा और अलौकिक पंडाल सजकर तैयार हो चुका है, जहाँ माता के दर्शन के लिए लाखों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है.
51वें साल की स्वर्ण जयंती और सबसे बड़ा पंडाल(CR Park Durga Puja)
सीआर पार्क के मेला ग्राउंड में आयोजित होने वाली यह दुर्गा पूजा इस बार अपने 51वें साल में प्रवेश कर चुकी है, जिसे लेकर बंगाली समुदाय और श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है. पूजा समिति के मुताबिक, मेला ग्राउंड में बनने वाला यह पंडाल सीआर पार्क में लगने वाले सभी पंडालों में आकार और भव्यता के मामले में सबसे बड़ा होता है.
बता दें हर साल की तरह इस बार भी इस विशाल पंडाल में माता के दिव्य दर्शन के लिए दिल्ली-एनसीआर के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है.
पंडाल को अंतिम रूप देने वाले बंगाल के कारीगर
पंडाल को बेहद भव्य, आकर्षक और कलात्मक रूप देने के लिए पश्चिम बंगाल से विशेष शिल्पकारों और कारीगरों को बुलाया गया है, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर इसे तैयार किया है. मेला ग्राउंड की विशालता और यहाँ की नायाब थिमैटिक सजावट दर्शकों का मन मोह रही है, जो बिल्कुल कोलकाता जैसी जीवंत अनुभूति करा रही है. पंचमी के दिन से ही यहाँ मां दुर्गा की दिव्य प्रतिमा स्थापित कर दी गई है, जिसके बाद षष्ठी से लेकर नवमी तक यहाँ भक्तों का तांता लगा हुआ है और पूरा परिसर रोशनी से जगमगा रहा है.
मेला ग्राउंड की शान
सीआर पार्क के मेला ग्राउंड की यह पूजा (CR Park Durga Puja) सिर्फ धार्मिक दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ लगने वाला विशाल फूड कोर्ट इसकी सबसे बड़ी शान बना हुआ है. यहाँ आने वाले लोग एग रोल, फिश कटलेट, मुगलाई पराठा और ऑथेंटिक बंगाली मिठाइयों का लुत्फ उठाने के लिए खासतौर पर पहुंच रहे हैं. इसके साथ ही, पंडाल परिसर के आसपास लगने वाले स्टॉल्स पर पारंपरिक बंगाली साड़ियों और हैंडीक्राफ्ट की बंपर खरीदारी हो रही है, जिससे पूरा मेला बाजार गुलजार है और उत्सव का रोमांच अपने चरम पर है.
पंचमी से दशमी तक बंगाली संस्कृति का महा-उत्सव
पंचमी पर मां के बोधन के साथ शुरू हुआ यह उत्सव षष्ठी, महासप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी के पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है. महाअष्टमी की शाम यहाँ होने वाला पारंपरिक ‘धुनुची नाच’ और ढाक की गूंज इस पूरे माहौल को पूरी तरह भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंग रही है. विजयदशमी के दिन सिंदूर खेला के बाद नम आँखों से मां दुर्गा को विदाई दी जाएगी, लेकिन फिलहाल इस गोल्डन जुबली उत्सव की धूम ने पूरी राजधानी का ध्यान अपनी ओर खींच रखा है.
-भारत एक्सप्रेस
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