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Diwali 2025: लक्ष्मी पूजा के लिए कौन सा मुहूर्त सबसे शुभ है? दिल्ली, मुंबई,चंडीगढ़…. के लिए जानें

दिवाली का पर्व केवल रोशनी का नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का भी है. जानिए माता लक्ष्मी और गणेश पूजा का सही समय, पूजा विधि और दीपक जलाने के रीति-रिवाज, ताकि घर में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.

Lakshmi Ganesh Worship

Diwali 2025: देशभर में आज (20 अक्टूबर) दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है, जो अंधकार पर ज्ञान और प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है. यह त्योहार केवल रोशनी और खुशियों का ही नहीं, बल्कि धार्मिक महत्व का भी होता है. दिवाली के दिन घरों और मंदिरों में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है. जहां लक्ष्मी पूजा से धन, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है, वहीं गणेश पूजा घर और कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करती है.

हर शहर में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त अलग-अलग होता है, इसलिए सही समय पर पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. इस बार दोपहर का मुहूर्त 3:44 बजे से 5:46 बजे तक रहेगा. वहीं, शाम का शुभ समय 5:46 बजे से 7:21 बजे तक और रात्रि लाभ मुहूर्त 21 अक्टूबर को 10:31 बजे से 12:06 बजे तक होगा. इसके अलावा प्रातः काल का मुहूर्त 21 अक्टूबर को 1:41 बजे से 6:26 बजे तक रहेगा.

लाल या गुलाबी वस्त्र से सजाएं पूजा स्थल

दिवाली पूजा की विधि में सबसे पहले पूर्व दिशा या ईशान कोण में पूजा चौकी स्थापित करना चाहिए. चौकी पर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाकर पूजा सामग्री तैयार करें. गणेश जी की मूर्ति को पहले चौकी पर रखें और उनके दाहिनी ओर माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. पूजा स्थल तैयार होने के बाद चारों ओर जल छिड़कें और मन में संकल्प लेकर पूजा शुरू करें.

पूजा की शुरुआत दीपक जलाकर करें. इसके बाद माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को फूल, मिठाई और अन्य सामग्री अर्पित करें. अर्पण के बाद सबसे पहले गणेश जी और फिर माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें. मंत्र जाप के पश्चात आरती करें और शंख ध्वनि से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

पूजा के बाद घर के सभी हिस्सों में दीपक जलाएं. दीपक सिर्फ घर में ही नहीं, बल्कि कुएं के पास और मंदिर में भी जलाए जाते हैं. इस अवसर पर लाल, पीले या चमकदार रंग के वस्त्र पहनें और काले, नीले या भूरे रंग से परहेज करें.

दिवाली का ऐतिहासिक महत्व

दिवाली का ऐतिहासिक महत्व भी अत्यंत विशेष है. इसे भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है. जब प्रभु राम अयोध्या पहुंचे, तो नगरवासियों ने दीपक जलाकर घरों और गलियों को रोशन किया और भव्य स्वागत किया. यही कारण है कि आज भी दिवाली घर-घर में खुशियों और रोशनी का संदेश लेकर आती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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