हिंदू संस्कृति में शादी केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक पवित्र धार्मिक संस्कार भी मानी जाती है. इसीलिए शादी से जुड़ी कई परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं, और अधिकांश परिवार आज भी उनका पालन करते हैं. इन्हीं परंपराओं में से एक यह है कि छोटे भाई की शादी तब तक नहीं होती जब तक बड़ा भाई शादी नहीं कर लेता. लेकिन क्या है इसके पीछे का कारण और इसका महत्व क्या है?
हिंदू विवाह शास्त्रों के मुताबिक, अगर बड़ा भाई के अविवाहित रहते हुए छोटा भाई शादी कर ले, तो इसे अशुभ माना जाता है. इसे ‘परिवेत्ता दोष’ कहा जाता है और माना जाता है कि इसके चलते छोटे भाई के जीवन में कुछ परेशानियां या बाधाएं आ सकती हैं. इसलिए परिवार में हमेशा पहले बड़े भाई की शादी को प्राथमिकता दी जाती रही है.
परिवार और समाज में बड़े भाई का विशेष दर्जा होता है. पुराने समय में बड़े भाई को पिता के बराबर माना जाता था और कई महत्वपूर्ण कार्यों में उसका निर्णय पहले लिया जाता था. इसी वजह से शादी जैसी महत्वपूर्ण घटना में भी पहले बड़े भाई का विवाह होना परंपरा का हिस्सा रहा है. अगर इस क्रम को उल्टा किया जाए, तो इसे सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अनुचित माना जाता है.
छोटा भाई कब शादी कर सकता है?
हालांकि, कुछ परिस्थितियों में यह नियम लागू नहीं होता है. अगर बड़ा भाई संन्यास लेने का निर्णय करता है या जीवनभर ब्रह्मचर्य का पालन करने की इच्छा रखता है और स्पष्ट रूप से कह देता है कि वह शादी नहीं करेगा, तो उस स्थिति में छोटे भाई की शादी में कोई दोष नहीं माना जाता.
कुछ पुरानी मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि अगर पहले छोटे भाई की शादी हो और बाद में बड़ा भाई शादी करे, तो दोनों पर दोष लग सकता है. इसलिए पहले के समय में परिवार विशेष ध्यान रखता था कि बड़े बेटे की शादी पहले हो.
लेकिन आज के दौर में लोग इस परंपरा को अलग नजरिए से देखने लगे हैं. कई लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़ते हैं, तो कई इसे सिर्फ सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा मानते हैं.
भारतीय संस्कृति में ऐसी कई परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं, जिनका उद्देश्य परिवार में संतुलन और मर्यादा बनाए रखना होता है.
ये भी पढ़ें: ‘यौन शोषण, वसूली और…’; अशोक खरात के खिलाफ शिकायतों का अंबार, 50 से ज्यादा फोन कॉल्स ने खोली पोल
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




