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Roop Chaturdashi आज: इस दिन सुनी जाती है नरकासुर वध की कथा, कल लक्ष्मी पूजा के साथ मनेगी दिवाली

रूप चतुर्दशी पर यम को दीपदान करें. इस दिन श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय की कथा घर-घर सुनाई जाती है. दिवाली पर 8 मुहूर्तों में लक्ष्मी पूजा होगी. यह समृद्धि का त्योहार है, अंधकार पर उजाले की जीत होती है!

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Vijay Ram Edited by Vijay Ram

आज, 19 अक्टूबर 2025 को, जब सूर्य दोपहर 2 बजे रूप चतुर्दशी का स्वागत करता है, तो वातावरण में एक पवित्र कंपन महसूस होता है. पुराणों की कथाओं में वर्णित है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का संहार किया था, जो अंधकार और अधर्म का प्रतीक था. नरकासुर ने 16,000 कन्याओं को कैद कर रखा था, और कृष्ण की विजय ने न केवल उन्हें मुक्ति दी, बल्कि दिवाली के पांच दिनों की शुरुआत को रोशन किया.

कुछ ग्रंथों में कहा जाता है कि आधी रात में हनुमान जी का जन्म भी इसी चतुर्दशी पर हुआ, जो भक्ति और शक्ति का अवतार है. बंगाल में यह काली पूजा का दिन है, जहां मां काली की आराधना से बुराइयों का नाश होता है. आज शाम, यमराज के लिए दीपदान की विधि निभाई जाती है. हल्दी-मिलकर घी का दीपक बनाकर, चौमुखा दीप जलाएं और यम द्वार पर रखें.

मंत्र है: “ओम यमाय नमः”.

यह कर्म के फल की याद दिलाता है, कल के उबटन स्नान की तैयारी करता है.

2025 में अमावस्या 20 अक्टूबर दोपहर 3:44 बजे शुरू होकर 21 को शाम 5:54 बजे समाप्त होगी, जो पूजा के लिए आदर्श समय बनाती है.

लक्ष्मी पूजा के आठ मुहूर्त: समृद्धि का आह्वान

कल, 20 अक्टूबर को दीपावली का मुख्य पर्व है. अमावस्या के सायंकाल में लक्ष्मी पूजा के आठ शुभ मुहूर्त हैं, जो दिनभर फैले हैं. पहला लभ मुहूर्त दोपहर 3:30 से 5:00 बजे तक, उसके बाद अमृत काल शाम 5:00 से 6:30 तक. प्रदोष काल 5:54 बजे से शुरू होकर महत्वपूर्ण है. फिर गोधूलि, चरचाल, लाभ आदि. मुख्य लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 7:08 से 8:18 बजे तक है, जैसा कि ज्योतिषीय पंचांग बताते हैं.

घर सजाएं, रंगोली बनाएं, और गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित करें. पूजन सामग्री में पान का लोटा, नारियल, सुपारी, हल्दी-कुमकुम, फूल-माला, दूर्वा, लौंग-इलायची, मिठाई, फल, वस्त्र, घी का दीपक, शहद-पंचामृत, तिल का तेल शामिल हैं.

विधि सरल: गणेश पूजन से शुरू कर लक्ष्मी को आमंत्रित करें, आरती उतारें.

मंत्र: “ओम श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः”.

यह पूजा धन-धान्य की वर्षा करती है.

इस वर्ष प्रदोष काल 5:46 से 8:18 बजे रहेगा, वृषभ काल 7:08 से 9:03 तक, जो व्यापारियों के लिए विशेष लाभकारी है.

दीपोत्सव की चमक: एकता और उजाले की विजय

रूप चतुर्दशी से दीपावली तक की यह यात्रा केवल रस्में नहीं, बल्कि जीवन का संदेश है. नरकासुर वध की कथा हमें सिखाती है कि बुराई पर अच्छाई हमेशा जीतती है. घरों में दीये जलें, आतिशबाजी की ध्वनियां गूंजें, और परिवार एकत्र हो. अगले दिन गोवर्धन पूजा और भाई दूज तक यह उत्सव फैलेगा.

2025 में, जब दुनिया आर्थिक उतार-चढ़ाव से जूझ रही है, लक्ष्मी पूजा समृद्धि का प्रतीक बनती है. आइए, इस त्योहार से प्रेरणा लें – अंधकार को दीपक से हराएं, और नई शुरुआत का संकल्प लें. दिवाली केवल रोशनी का नहीं, बल्कि आत्मा का उत्सव है.



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