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हर साल बढ़ता है शिवलिंग का आकार, आखिर क्या है उत्तराखंड के इस मंदिर का राज?

Koteswar Mahadev Temple Mystery: सावन में उत्तराखंड के टिहरी स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां लेटे हुए शिवलिंग की अनोखी मान्यता है. भागीरथी नदी के तट पर स्थित इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां शिवलिंग का आकार हर साल जौ के दाने जितना बढ़ता है.

Koteswar Mahadev Temple Mystery

Koteswar Mahadev Temple Mystery

Koteswar Mahadev Temple Mystery: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है. इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं. इन्हीं प्रसिद्ध शिव धामों में उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर भी शामिल है, जो अपनी अनोखी मान्यता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है.

भागीरथी नदी के तट पर स्थित है मंदिर

कोटेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के टिहरी जिले में भागीरथी नदी के किनारे स्थित है. यह मंदिर नरेंद्रनगर ब्लॉक के पट्टी क्वीली क्षेत्र में आता है. धार्मिक महत्व के साथ-साथ यहां का शांत वातावरण और पहाड़ी प्राकृतिक सौंदर्य भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. सावन के महीने में इस मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का आयोजन होता है. दूर-दूर से भक्त भगवान शिव के दर्शन करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचते हैं.

लेटे हुए शिवलिंग के कारण है खास पहचान

कोटेश्वर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां मौजूद लेटे हुए शिवलिंग हैं. जहां अधिकतर शिव मंदिरों में शिवलिंग खड़ी मुद्रा में दिखाई देते हैं, वहीं इस मंदिर में शिवलिंग विश्राम मुद्रा में विराजमान हैं. यही अनोखी विशेषता इस मंदिर को अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाती है.

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस शिवलिंग का आकार हर साल बढ़ता है. मान्यता है कि शिवलिंग का आकार प्रत्येक वर्ष एक जौ के दाने के बराबर बढ़ता है. इसी कारण भक्तों के बीच इस मंदिर को लेकर विशेष आस्था जुड़ी हुई है.

एक करोड़ देवताओं का वास मानते हैं भक्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ‘कोटेश्वर’ नाम का अर्थ एक करोड़ देवताओं का वास होता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस पवित्र स्थान पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है. मंदिर परिसर में शिव कुंड, पार्वती कुंड और सूर्य कुंड भी मौजूद हैं, जिनका धार्मिक महत्व बताया जाता है.

यह भी पढ़ें: सावन में शिव भक्ति का उत्साह, जानें व्रत कथा का महत्व और सोमवार पूजा के खास नियम

सावन में उमड़ रही भक्तों की भीड़

सावन के दौरान कोटेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है. श्रद्धालु शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित कर भगवान शिव की पूजा करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई आराधना से भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. धार्मिक आस्था, अनोखे शिवलिंग और प्राकृतिक सुंदरता के कारण कोटेश्वर महादेव मंदिर सावन में शिव भक्तों के लिए एक खास तीर्थ स्थल बन जाता है.

भारत एक्सप्रेस



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