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सावन में शिवभक्तों के लिए मनोज भावुक का भोजपुरी भक्ति गीत ‘मनवा के हमरा बनारस बना…’ रिलीज, मिले लाखों व्‍यूज

MANOJ BHAVUK BHOJPURI DEVOTIONAL SONG: सावन के पावन अवसर पर रिलीज सुप्रसिद्ध साहित्यकार व गीतकार मनोज भावुक का भोजपुरी भक्ति गीत ‘हे भोले बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs’ यूट्यूब पर काफी पसंद किया जा रहा है और पहले ही दिन इसे 5 लाख से अधिक व्यूज मिले हैं.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव और काशी की आध्यात्मिक महिमा पर आधारित भोजपुरी भक्ति गीत ‘हे भोले बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs’ रिलीज होते ही सोशल मीडिया और यूट्यूब पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. Bhojpuri IT Cell के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुए इस गीत को रिलीज के पहले ही दिन 5 लाख से अधिक लोगों ने देखा. यह गीत बनारस को केवल एक भौगोलिक शहर नहीं, बल्कि आत्मिक चेतना, भक्ति और मुक्ति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है.

भोजपुरी के दिग्गज कलाकारों का मिला साथ

इस गीत के रचनाकार भोजपुरी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं लोकप्रिय गीतकार मनोज भावुक हैं. इस भजन को सुरभि कश्यप और अर्जुन पांडेय ने अपनी मधुर आवाज से सजाया है, जबकि इसका संगीत भोजपुरी सिनेमा के चर्चित संगीतकार रजनीश मिश्रा ने तैयार किया है.

गीत की परिकल्पना आस्था द्विवेदी की है और इसका निर्देशन सुमित तिवारी ने किया है. इसका निर्माण वन शॉट फिल्म्स (One Shot Films) के बैनर तले निर्माता शैलेंद्र द्विवेदी द्वारा किया गया है.

‘केवल एक गाना नहीं, जीवन-दर्शन है यह गीत’

गीत के बारे में विचार साझा करते हुए मनोज भावुक ने बताया कि यह केवल एक सामान्य भक्ति गीत नहीं है, बल्कि यह बनारस की उस अनूठी जीवन-दृष्टि को समर्पित रचना है जहाँ शिवत्व, करुणा, वैराग्य और जीवन का आनंद एक साथ दिखाई देता है.

गीत का सुंदर मुखड़ा है:

“हे भोले बाबा, हे शंभु बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs,

दुख हो या सुख हो, मस्ती में राखs, जिनगी के नइया पार लगा दs…”

गीत के अंतरों में काशी विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट और धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष जैसे भारतीय दर्शन के मूल सिद्धांतों की बहुत ही सहज भोजपुरी में व्याख्या की गई है.

मनोज भावुक और रजनीश मिश्रा की सुपरहिट जोड़ी

गीतकार मनोज भावुक और संगीतकार रजनीश मिश्रा की जोड़ी इससे पहले भी ‘तोर बउरहवा रे माई’, ‘आपन कहाये वाला के बा’, ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ और ‘मेरे राम’ जैसे सुपर-डुपर हिट और अर्थपूर्ण गीत दे चुकी है.

मनोज भावुक का मानना है कि भोजपुरी संगीत की पहचान सिर्फ सतही मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नए गीतों के माध्यम से सामने लाना समय की आवश्यकता है. यह गीत शिवभक्तों के साथ-साथ साहित्य प्रेमी श्रोताओं के दिलों को भी गहराई से छू रहा है.



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