Ekadashi Kab Ki Hai: मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोक्षदा एकादशी कहा जाता है, हर वर्ष भक्तों के लिए बेहद खास मानी जाती है. यह तिथि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत न सिर्फ पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि जीवन के कष्ट भी दूर करता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है. यही कारण है कि लोग इस एकादशी का इंतजार पूरे साल करते हैं.
इस बार तिथि को लेकर कई लोगों में उलझन दिख रही है, आखिर मोक्षदा एकादशी 30 नवंबर को मानें या 1 दिसंबर को? आइए, हिंदू पंचांग के अनुसार पूरी जानकारी समझते हैं.
इस साल कब रखेंगे मोक्षदा एकादशी का व्रत?
पंचांग के मुताबिक एकादशी तिथि 30 नवंबर रात 9:29 बजे शुरू होगी और 1 दिसंबर शाम 7:01 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के नियम के हिसाब से व्रत वही माना जाता है जो सूर्योदय पर होती है, इसलिए मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर 2025 (सोमवार) को रखा जाएगा.
पूजा कब करें?
मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए दिन भर कई शुभ योग बन रहे हैं. इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:11 से 6:05 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:57 से 2:39 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:23 से 5:50 बजे तक
- निशीथ काल: रात 11:46 से 12:40 बजे तक
इन मुहूर्तों में पूजा करने से पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है.
व्रत पारण कब करें?
जिन लोगों ने एकादशी का व्रत रखा होगा, वे अगले दिन यानी 2 दिसंबर को पारण कर सकते हैं. पारण का सही समय सुबह 6:17 बजे से 8:25 बजे तक बताया गया है.
भद्रा और पंचक का भी रहेगा असर
इस साल मोक्षदा एकादशी पर भद्रा का साया भी रहेगा. भद्रा का समय सुबह 8:20 बजे से शाम 7:01 बजे तक रहेगा. इस दौरान भद्रा पृथ्वी लोक पर रहेगी. साथ ही इस दिन पंचक भी पड़ रहा है, इसलिए कुछ धार्मिक कार्यों में लोग सावधानी बरतते हैं.
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मोक्षदा एकादशी की पूजा कैसे करें?
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठना और स्नान के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.
- विष्णु भगवान का जल और पंचामृत से अभिषेक करें.
- उन्हें पीला चंदन, फूल, तुलसी दल, अक्षत, माला और भोग अर्पित करें.
- दीपक और धूप जलाकर विष्णु मंत्र, विष्णु सहस्रनाम, चालीसा और मोक्षदा एकादशी की कथा पढ़ें.
- पूजा के अंत में आरती कर भगवान से क्षमा प्रार्थना करें.
- पूरे दिन व्रत का पालन करने के बाद अगले दिन विधिविधान से पारण करें.
मोक्षदा एकादशी मंत्र
मोक्षदा एकादशी पर शुभ समय पर भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है.
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि. तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो , मा दभ्रं भूर्या भर. भूरि घेदिन्द्र दित्ससि . ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्. आ नो भजस्व राधसि .
ॐ अं वासुदेवाय नम:.. ॐ आं संकर्षणाय नम:.. ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:.. ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:.. ॐ नारायणाय नम:..
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान. यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते..
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे. हे नाथ नारायण वासुदेवाय..
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