Nag Panchami
Nag Panchami: नागपंचमी के मौके पर सांपों को लेकर धार्मिक आस्था के साथ इनके बारे में सही जानकारी होना भी बेहद जरूरी है. भारत में सांपों की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही इंसानों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में करीब 90 फीसदी सांप के काटने की घटनाएं चार प्रमुख जहरीली प्रजातियों—कॉमन करैत, इंडियन कोबरा, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर—से जुड़ी हैं.
कॉमन करैत: रात में बढ़ता खतरा
कॉमन करैत का जहर मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है. इसके काटने के बाद गंभीर मामलों में मांसपेशियों का पक्षाघात और सांस लेने में परेशानी हो सकती है. करैत को भारत के ‘बिग फोर’ जहरीले सांपों में शामिल किया जाता है.
रसेल वाइपर से सबसे ज्यादा खतरा
उपलब्ध भारतीय अध्ययनों में रसेल वाइपर को सबसे अधिक चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण सांपों में माना गया है. एक व्यापक अध्ययन में पहचाने गए सांपों के काटने के मामलों में रसेल वाइपर की हिस्सेदारी करीब 43 फीसदी थी, जबकि करैत और कोबरा के मामले भी बड़ी संख्या में सामने आए. हालांकि, सभी सांपों के मामलों में सांप की प्रजाति की पहचान नहीं हो पाती, इसलिए मौतों को केवल एक प्रजाति से जोड़ना सावधानी की मांग करता है.
इंडियन कोबरा: फन फैलाने वाला खतरनाक सांप
इंडियन कोबरा भारत में सबसे पहचानने योग्य जहरीले सांपों में से एक है. इसका विष तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है और गंभीर स्थिति में सांस लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा, कोबरा के काटने पर समय पर चिकित्सा उपचार बेहद महत्वपूर्ण है.
सॉ-स्केल्ड वाइपर: छोटा लेकिन बेहद जहरीला
सॉ-स्केल्ड वाइपर आकार में अपेक्षाकृत छोटा हो सकता है, लेकिन इसका विष गंभीर रक्तस्राव और रक्त के जमने की प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. यह भी भारत के ‘बिग फोर’ में शामिल है.
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सांप काटे तो क्या करें?
भारत में 2000 से 2019 के बीच अनुमानित 12 लाख लोगों की मौत सांप के काटने से हुई, यानी औसतन करीब 58 हजार मौतें हर साल हुईं. इनमें बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में हुई और बारिश के मौसम में जोखिम बढ़ा. सांप के काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए. प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं और बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा या घरेलू नुस्खा न आजमाएं. सही समय पर अस्पताल पहुंचना और आवश्यक एंटी-स्नेक वेनम उपचार मिलना जान बचाने में अहम हो सकता है.
भारत एक्सप्रेस
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