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Sharadiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि 2026 का आगाज हो चुका है. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आज की तनावभरी लाइफस्टाइल में मानसिक स्थिरता और ‘माइंडफुलनेस’ पाने का सबसे बड़ा आध्यात्मिक जरिया है.
नवरात्रि का पहला दिन हमारे भीतर की आंतरिक ऊर्जा को संतुलित करने का अवसर है. योग विज्ञान में मां शैलपुत्री को मूलाधार चक्र की स्वामिनी माना गया है, जो व्यक्ति को असुरक्षा और तनाव से मुक्त कर ‘ग्राउंडिंग’ प्रदान करता है. उनके हाथ में त्रिशूल, कमल और सवारी नंदी आज के वर्क-लाइफ बैलेंस और मेंटल रिजिलियंस के सटीक प्रतीक हैं.
नवरात्रि 2026: मां शैलपुत्री की पूजा सिर्फ अनुष्ठान नहीं, मानसिक ‘माइंडफुलनेस’ और दृढ़ता की शुरुआत
रविवार, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत हो चुकी है. देश भर के पूजा पंडालों और घरों में घटस्थापना के साथ शक्ति की पहली देवी मां शैलपुत्री की आराधना की जा रही है. अमूमन देवी के जन्म की पौराणिक कथाएं हर जगह पढ़ने को मिलती हैं, लेकिन आज की तेजी से बदलती कॉरपोरेट जिंदगी में मां शैलपुत्री का यह रूप धार्मिक अनुष्ठान से परे मानसिक दृढ़ता (Mental Resilience) का एक अनूठा पाठ है.
मूलाधार चक्र और ‘ग्राउंडिंग’ का योग विज्ञान
योग और आध्यात्मिक विश्लेषकों के अनुसार, मां शैलपुत्री हमारे शरीर के मूलाधार चक्र (Muladhara Chakra) की स्वामिनी हैं. मूलाधार चक्र हमारे पूरे ऊर्जा तंत्र की नींव है, जो सुरक्षा और अस्तित्व की भावना को नियंत्रित करता है. आज जब युवा करियर, एंग्जायटी और अकेलेपन के दौर से गुजर रहे हैं, तब मां शैलपुत्री का ध्यान व्यक्ति को ‘ग्राउंडेड’ (Grounded) रखता है और विकट परिस्थितियों में भी विचलित न होने की शक्ति देता है.
प्रतीकों में छिपा मॉडर्न ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’
मां शैलपुत्री का चित्रण आज के प्रोफेशनल जीवन के लिए एक गाइडलाइन की तरह है:
- दाहिने हाथ में त्रिशूल: यह तीव्र इच्छाशक्ति और प्रहार क्षमता का प्रतीक है, जो सिखाता है कि जीवन की बाधाओं का सामना कैसे करें.
- बाएं हाथ में कमल: कीचड़ में भी खिलने वाला कमल डिटैचमेंट और शांति दर्शाती है, यानी आसपास टॉक्सिसिटी होने पर भी मन को शुद्ध रखना.
- वाहन वृषभ (नंदी): नंदी बैल निडरता और अटूट संकल्प का उदाहरण है, जो तय लक्ष्य पर पहाड़ों की तरह टिके रहने की प्रेरणा देता है.
‘री-बूट’ और शून्य से शुरुआत करने का हुनर
मां शैलपुत्री का जीवन ‘द आर्ट ऑफ री-स्टार्ट’ पर आधारित है. सती के रूप में अपना सब कुछ त्यागने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि राजा हिमालय की पुत्री के रूप में पुनर्जन्म लेकर अपनी शक्तियों को पहचाना. यह कथा हमें सिखाती है कि जीवन में चाहे कितना भी बड़ा ब्रेकडाउन आए, खुद को री-बूट करके शून्य से एक नई और मजबूत शुरुआत की जा सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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