Pitru Paksha Panchang: हिंदू पंचांग और सनातन परंपराओं के अनुसार, पितृ पक्ष का यह पावन समय पूर्वजों के प्रति सम्मान, श्रद्धांजलि और कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है. आगामी 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है, जो पितृ पक्ष के अंतर्गत अष्टमी श्राद्ध के रूप में मनाई जाएगी. आइए जानते हैं इस दिन के पंचांग, श्राद्ध के शुभ मुहूर्तों और धार्मिक अनुष्ठानों की पूरी जानकारी.
तिथि और श्राद्ध के शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह 7:59 बजे से शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह 5:51 बजे तक रहेगी.
श्राद्ध का महत्व: अष्टमी श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी पक्ष की अष्टमी तिथि को हुई हो. इस दिन परिवार के लोग विधि-विधान से तर्पण, पिंडदान, भोजन अर्पण और दान-पुण्य करते हैं.
कुतुप और अपराह्न मुहूर्त: श्राद्ध कर्मों के लिए दिन के शुभ मुहूर्तों का विशेष महत्व होता है. इसके तहत कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा. इसके पश्चात रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:33 बजे से 1:21 बजे तक और अपराह्न काल दोपहर 1:21 बजे से 3:42 बजे तक प्रभावी रहेगा. (नोट: यह समय स्थानीय पंचांग के अनुसार है, अतः शहर के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है.)
पितृ पक्ष के इन विशेष दिनों में लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के नियमों का पालन करते हुए अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं.
- 3 अक्टूबर 2026 को कौन सा श्राद्ध किया जाएगा?
उत्तर: इस दिन अष्टमी श्राद्ध किया जाएगा - अष्टमी तिथि कब से कब तक है?
उत्तर: अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह 7:59 बजे से शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह 5:51 बजे तक रहेगी - श्राद्ध कर्म के लिए ‘कुतुप मुहूर्त’ का समय क्या है?
उत्तर: कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा - अपराह्न काल की अवधि क्या है?
उत्तर: अपराह्न काल दोपहर 1:21 से 3:42 बजे तक रहेगा - पितृ पक्ष में अष्टमी श्राद्ध का क्या महत्व है?
उत्तर: यह उन पूर्वजों के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी पक्ष की अष्टमी तिथि को हुई हो
अस्वीकरण (Disclaimer): पितृपक्ष के संबंध में यह जानकारी (Pitru Paksha Panchang) पंचाग सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं के साथ ही तमाम स्थानों, प्रवचनों के आधार पर तैयार की गई है. भारत एक्सप्रेस इसकी कोई नैतिक पुष्टि नहीं करता है और न ही किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देता है. पाठक अपने विवेक और व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार ही निर्णय लें.
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