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‘लोहार्गल’ आप भी आएंगे क्‍या? यह है देश का सबसे सिद्ध-चमत्कारी पितृ तीर्थ, सूर्यकुंड में विसर्जित होती हैं अस्थियां; पांडवों से ताल्‍लुक

Lohargal Surya Kund Pitru Paksha Pind Daan: राजस्थान के लोहार्गल स्थित सूर्यकुंड में पितृपक्ष पर पिंडदान का विशेष महत्व है. महाभारत काल में पांडवों के शस्त्र यहीं गले थे और परशुराम जी ने भी तर्पण किया था.

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Lohargal Surya Kund: राजस्थान के शेखावाटी अंचल में अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित ‘लोहार्गल’ (लोहागढ़) धाम को देश के सबसे सिद्ध व चमत्कारी पितृ तीर्थों में गिना जाता है. पितृपक्ष के दौरान यहां देश भर से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए पहुंच रहे हैं. इस तीर्थ की सबसे अनूठी धार्मिक मान्यता यह है कि यहां के पवित्र सूर्यकुंड में अस्थि विसर्जन करने पर अस्थियां पानी में गलकर जल रूप हो जाती हैं, जिससे जीवात्मा को तत्काल मोक्ष प्राप्त होता है.

पांडवों के अस्त्र-शस्त्र गलने से पड़ा ‘लोहार्गल’ नाम

महाभारत कालीन मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध में अपने ही कुल-कुटुंब के वध के पाप से पांडव अत्यंत व्यथित थे. भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें प्रायश्चित के लिए तीर्थाटन की सलाह देते हुए कहा था कि जिस पावन जल में उनके अस्त्र-शस्त्र स्वतः गल जाएंगे, वहीं उनका पाप नष्ट होगा. जब पांडव भ्रमण करते हुए लोहार्गल पहुंचे और सूर्यकुंड में स्नान किया, तो अर्जुन का गांडीव धनुष और भीम की गदा सहित समस्त लोहे के शस्त्र जल में गल गए. इसके बाद पांडवों को मुक्ति मिली और इसी घटना से इस स्थल का नाम ‘लोहार्गल’ (जहां लोहा गल जाए) विख्यात हुआ.

परशुराम जी ने किया था पिता जमदग्नि का तर्पण

पौराणिक आख्यानों के मुताबिक, भगवान परशुराम ने भी क्षत्रियों के संहार के पश्चात इसी धाम में आकर प्रायश्चित महायज्ञ किया था. उन्होंने यज्ञ की वेदी को तीर्थ के पावन जल से शांत कर अपने पिता महर्षि जमदग्नि का विधिवत तर्पण किया था. पीठाधीश्वर अवधेशाचार्य के अनुसार, लोहार्गल वह पावन भूमि है जिसकी सुरक्षा स्वयं जगतपिता ब्रह्मा करते हैं. मुख्य तीन पर्वतों से निकलने वाली सात जलधाराओं से निर्मित सूर्यकुंड में स्नान और नाम-गोत्र से पिंडदान करने पर पितरों को असीम शांति मिलती है.

प्राचीन सूर्य मंदिर, विशाल बावड़ी और मालकेतु धाम

लोहार्गल केवल पितृ कर्म ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और स्थापत्य संपदा का भी केंद्र है. यहां प्राचीन सूर्य मंदिर, वनखंडी जी मंदिर, शिव मंदिर, हनुमान मंदिर और पांडव गुफा स्थित हैं. परिसर में राजस्थान की प्राचीन व विशाल ऐतिहासिक बावड़ियों में शामिल एक सुंदर बावड़ी भी मौजूद है. श्रद्धालु सूर्यकुंड में पितृ कर्म संपन्न करने के बाद करीब 400 सीढ़ियां चढ़कर मालकेतु जी के दर्शन कर अपनी यात्रा पूर्ण करते हैं.

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