Jagannath Puri Neelachakra Moon Alignment: ओडिशा के पवित्र धाम पुरी स्थित प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर से एक बेहद अद्भुत और दुर्लभ दृश्य सामने आया है. बीती 28 सितंबर 2026 की तड़के मंदिर के शिखर पर श्रद्धालुओं को एक ऐसा विहंगम नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को भक्ति और आनंद से सराबोर कर दिया. सुबह करीब 5:10 बजे मंदिर के मुख्य शिखर पर स्थापित पावन नीलचक्र के ठीक पीछे चमकता हुआ पूर्णचंद्र नजर आया.
चक्र के भीतर से प्रकाश बिखेरता दिखा चंद्रमा
मंदिर के ऊपर नीले आसमान में चंद्रमा की स्थिति ऐसी बनी हुई थी, मानो वह नीलचक्र के ठीक केंद्र में विराजमान होकर चारों ओर अपना अलौकिक प्रकाश बिखेर रहा हो. इस विहंगम दृश्य के दौरान सफेद रंग का विशाल शिखर, उस पर लहराता पतितपावन बाना (ध्वज) और नीलचक्र के पीछे से झांकता चंद्रमा एक फ्रेम में कैद हो गए. मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने जब यह मनमोहक दृश्य देखा तो पूरा वातावरण ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारों से गूंज उठा.
भक्तों ने बताया महाप्रभु की कृपा का प्रतीक
सोशल मीडिया पर इस अलौकिक नजारे का वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं. देश-विदेश के लाखों भक्त इसे प्रकृति का भगवान जगन्नाथ के चरणों में समर्पित एक पावन नमन मान रहे हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि यह केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि महाप्रभु की अलौकिक कृपा और आध्यात्मिक आनंद की प्रत्यक्ष अनुभूति है.
आपको बता दें कि जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर अष्टधातु से बना नीलचक्र स्थापित है, जिसे भगवान श्रीहरि के सुदर्शन चक्र का स्वरूप माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह नीलचक्र महाप्रभु की उपस्थिति और ब्रह्मांडीय सुरक्षा का प्रतीक है.
क्या कहते हैं जानकार?
हालांकि खगोलशास्त्रियों और विशेषज्ञों का मानना है कि कैमरे के विशेष एंगल और चंद्रमा की खास स्थिति के कारण ऐसा दृश्य कभी-कभी दिखाई देता है. लेकिन इसके बावजूद, जिस तरह से नीलचक्र और चंद्रमा का यह दुर्लभ संयोग बना, उसने विज्ञान और आस्था के इस खूबसूरत संगम को हर भक्त के दिल में हमेशा के लिए यादगार बना दिया है.
यह भी पढ़ें: सोमवार आधी रात बदलेगी तिथि, क्या है भद्रा और दशमी श्राद्ध का सही मुहूर्त? पढ़ें आज का पंचांग
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

