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Sawan 2025: भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग क्यों है खास अन्य ज्योतिर्लिंगों से, जानिए यहां छिपे रहस्यों को

भीमाशंकर मंदिर में अद्भुत स्थापत्य कला देखने को मिलती है. यह प्राचीन काल की नायब शिल्पकला को दर्शाता है. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण महाराष्ट्र के राजा छत्रपति शिवाजी ने कराया था

Sawan2025: भारत में 12 ज्योतिर्लिंग है जिनमें भीमाशंकर छठा ज्योतिर्लिंग है. यह महाराष्ट्र के पूना में स्थित है. पूना से भीमाशंकर की दूरी 110 किलोमीटर है. सावन के महीने में यहां भारी संख्या में श्रद्धालु बाबा भोले नाथ की पूजा अर्चना करने आते हैं. कहा जाता है कि यहां दर्शन पूजन से भगवान शंकर लोगों के सभी कष्ट दूर कर देते हैं. यह मंदिर जंगल के बीच स्थित है. यह स्थान सोमंच से भरा हुआ है. भीमाशंकर से जुड़ी पौराणिक कथा काफी रोचक है. इसका जिक्र पुराणों में मिलता है.

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग शिराधन गांव में स्थित है. भीमाशंकर की कथा शिवपुराण में वर्णित है. इस कथा में रावण के भाई कुंभकरण का पुत्र भीमा भगवान राम से अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए कठोर तपस्या करता है. भीमा ने कठिन जप तप से वरदान स्वरूप ब्रह्मा जी से अपार शक्तियां हासिल कर लीं थीं. ब्रह्मा जी के वरदान से वह अजेय हो गया और अब वह अपने आतंक से देवताओं को परेशान करने लगा. भीमा को अपनी शक्ति का काफी अहंकार था जिसके कारण वह पृथ्वी पर अत्याचार करने लगा.

भीमा ने ऋषियों और साधु संतों की तपस्या भंग कर उन्हें परेशान कर दिया था. सब जगह उसका भय काफी बढ़ गया था जिसके कारण ऋषि मुनि, देवता भगवान शिव की शरण में चले गए. उन्होंने भगवान शिव से भीमा के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की. भगवान शिव ने सभी पीड़ितों को बात सुनते हुए भीमा से जबरदस्त युद्ध किया. यह युद्ध कई दिनों तक चला, आखिरकार भगवान शंकर ने भीमा का बध कर दिया. इसी स्थान पर भगवान शंकर ने ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया. भगवान विष्णु के आशीर्वाद से भीमाशंकर शिवलिंग में भीमा का नाम शंकर भगवान के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया. इसीलिए यह स्थान भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्व हुआ. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में साल भर काफी श्रद्धालु आते हैं लेकिन सावन महीने में यहां काफी भीड़ बढ़ जाती है.

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का ऐतिहासिक महत्व

भीमाशंकर मंदिर में अद्भुत स्थापत्य कला देखने को मिलती है. यह प्राचीन काल की नायब शिल्पकला को दर्शाता है. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण महाराष्ट्र के राजा छत्रपति शिवाजी ने कराया था. मंदिर परिसर में कई छोटे-छोटे मंदिर भी हैं. मंदिर परिसर में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा का भी एक छोटा सा स्थान है जिसमें साधु संत रहकर पूजा पाठ करते रहते हैं. इस मंदिर के पास कुंभकरण के पुत्र भीमा के नाम से भीमा नदी भी है. जंगलों के भीतर गुप्त भीमाशंकर मंदिर भी है.गुप्त भीमाशंकर जाने के लिए जंगल के रास्ते से होकर जाना पड़ता है.

भीमाशंकर अध्यात्म और प्रकृति का एक अद्भुत मिश्रण है.

तीर्थ यात्री/पर्यटक भीमा शंकर ज्योतिर्लिंग की पूजा अर्चना करने के साथ प्रकृति का भी आनंद लेते हैं. भीमाशंकर में भीमा नदी, हनुमान झील और तमाम झरने प्राकृतिक सौंदर्य से भरे पड़े हैं. यहां बहुत सी वैरायटी की बर्डस भी देखने को मिलती हैं. पर्यटकों के लिए यह सब काफी रोमांचकारी है. यहां आने के बाद जाने का मन नहीं करता है. तीर्थ यात्रियों के रुकने के लिए यहां कोई स्थान नहीं है.

भीमाशंकर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में है जैव विविधता और गिलहरियों की भरमार

भीमाशंकर वाइल्ड सेंचुरी का नाम भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के नाम पर पड़ा. यह जगह अपनी जैव विविधता और गिलहरियों के स्थान के रूप में जाना जाता है. यहां बहुत तरह की बर्डस भी पर्यटकों को काफी आकर्षित करती हैं. भीमाशंकर में कई तरह की दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं जो भारत के किसी अन्य क्षेत्र में नहीं मिलती हैं. वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के नियमों को लेकर वन विभाग ने इस क्षेत्र में पक्के निर्माण पर पाबंदी लगा रखी है. इसी कारण यहां तीर्थ यात्रियों को रुकने के लिए कोई होटल आदि नहीं हैं. तीर्थयात्री/पर्यटकों को यहां रुकने के लिए भीमाशंकर से 10 किलोमीटर दूर होटल/रिजॉर्ट्स उपलब्ध हैं.
भीमाशंकर एक ऐसा धार्मिक स्थान है जो प्राकृतिक चमत्कारों से भरा पड़ा है.

भारत एक्सप्रेस 



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