Swami Kailashanand Giri
सावन के चौथे सोमवार के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. अलसुबह से ही मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठा. दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने मां दक्षिण काली और भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की.
इस अलौकिक आध्यात्मिक माहौल के बीच निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की कठिन साधना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बनी रही.
असहनीय दर्द के साथ 27 घंटे की अखंड साधना
गुरुदेव स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने शारीरिक कष्ट और पैरों में असहनीय पीड़ा के बावजूद लगातार 27 घंटे तक कठिन साधना कर नया रिकॉर्ड बनाया. खड़े होने में भारी कठिनाई और शारीरिक असमर्थता के बाद भी उनका संकल्प नहीं डगमगाया और उनकी तपस्या अनवरत जारी रही.
मंदिर परिसर में स्थापित साधना स्थल पर जब भक्तों ने उन्हें लीन देखा, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा. श्रद्धालुओं का कहना था कि गुरुदेव के इस तपस्वी और त्यागी स्वरूप में उन्हें प्रत्यक्ष ‘शिव तत्व’ का अहसास हो रहा है.
‘साधना में दिखता है शिव तत्व’
इस दौरान पूर्व कांग्रेस नेता और पीठधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी महाराज भी दक्षिण काली मंदिर पहुंचे और स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की तपस्या के दर्शन किए. गुरुदेव की साधना और संकल्प को देखकर आचार्य प्रमोद कृष्णम भाव-विभोर हो गए.
उन्होंने कहा कि गुरुदेव के भीतर स्पष्ट रूप से शिव तत्व का प्रकाश दिखाई देता है. इस भावुक मुलाकात के साक्षी बने श्रद्धालु भी दोनों संतों के इस मिलन को देखकर अभिभूत नजर आए.
शरीर की गंभीर पीड़ा के बावजूद साधना के प्रति ऐसा अडिग संकल्प और समर्पण आज दक्षिण काली मंदिर को देश भर के श्रद्धालुओं के लिए अगाध श्रद्धा और विश्वास का एक बड़ा केंद्र बना रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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