Bhavnath temple, Gujarat
Sawan 2025: गुजरात में आज सावन महीने का पहला दिन है. गुजरात के सोमनाथ मंदिर और जूनागढ़ स्थित भवनाथ मंदिर( Bhavnath temple ) सहित शिवालयों में लाखों शिवभक्त उमड़ रहे हैं. सबसे अधिक भीड़ गिर सोमनाथ जिले में अरब सागर के तट पर स्थित भगवान शंकर के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर में है. जूनागढ़ स्थित प्राचीन भवनाथ मंदिर में भी देश भर से शिवभक्त पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं. भवनाथ मंदिर के महंत एवं जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए विशेष व्यवस्था की हैं, जिससे शिवभक्तों को कोई दिक्कत न हो.

गुजरात में सावन माह माह देर से क्यों होता है शुरू
गुजरात में सावन का महीना 25 जुलाई से शुरू हो रहा है. सावन माह आज से शुरू होकर 23 अगस्त तक चलेगा. ज्योतिषाचार्य डॉ बृजेंद्र मिश्र के अनुसार गुजरात में अमांत पंचांग का पालन किया जाता है, जिसके अनुसार महीने की गणना अमावस्या से होती है. हजारों वर्षों से यहां के लोग चंद्रमा की प्रगति मानते हुए शुक्ल पक्ष को सर्वोत्तम मानते हैं. चंद्रमा भी अपनी तमाम गतिविधियों को पूरा करते हुए पूर्णिमा तक पूर्ण होता है. बृजेंद्र मिश्र कहते हैं कि गुजराती सावन माह में इस बार 20 वर्षों के बाद कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं.
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गिरनार पर्वत की तलहटी में स्थित है Bhavnath temple
भवनाथ मंदिर ( Bhavnath Temple )जूनागढ़ स्थित एक प्राचीन मंदिर है. यह गिरनार पर्वत की तलहटी में स्थित है. इस मंदिर में 2 शिवलिंग हैं जिनमें 1 स्वयंभू शिवलिंग है जो खुद प्रकट हुआ था. दूसरे शिवलिंग की स्थापना द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा ने की थी. पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन भगवान शिव पार्वती के साथ गिरनार पर्वत पर घूम रहे थे तभी उनका वस्त्र मृगीकुंड में गिर गया जिससे यह स्थान पवित्र हो जाता है. कहा जाता है कि सावन माह में भगवान शिव भवनाथ मंदिर में वास करते हैं. मंदिर के पास ही भृगु कुंड है जिसके जल में स्नान करने से शरीर के सभी चर्म रोग ठीक हो जाते हैं.

सावन के पहले दिन Bhavnath temple में भारी भीड़
सावन के पहले दिन भवनाथ मंदिर में भोर से ही शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. लाखों श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के साथ बेल पत्र,धतूरा,फल फूल,दूध, मिठाई, आंक के पत्ते, शमी आदि बाबा भोलेनाथ को पूरी भक्ति के साथ समर्पित कर रहे हैं. मंदिर के बाहर भोर से ही लंबी लंबी कतारें लगी हुई हैं. भक्तों को लगभग 5 से 6 घंटे तक पूजा के लिए अपना नंबर आने में लग जा रहा है. शिवभक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है, हर हर महादेव के जयकारे चारो ओर सुनाई पड़ रहे हैं.
भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए खास इंतजाम किए हैं. जूनागढ़ में वाहनों के लिए डाइवर्जन स्कीम लागू की गई है और कई क्षेत्रों में बैरिकेटिंग कर शिवभक्तों के आने और जाने वाले मार्ग बनाए गए हैं. इस पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी का जाल बिछा दिया गया है जिससे सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस की निगाह से चप्पे चप्पे पर रहे.

जूनागढ़ शहर स्थित प्राचीन गिरनार पर्वत है धार्मिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र.
जूनागढ़ में गिरनार नामक प्राचीन पर्वत है, ये हिमालय से भी पुराना पर्वत माना जाता है. इस पर्वत को देवी देवताओं का वास कहा जाता है. मान्यता है कि गिरनार पर्वत की परिक्रमा करने से काफी पुण्य लाभ मिलता है. हजारों की संख्या में प्रतिदिन श्रद्धालु गिरनार पर्वत की परिक्रमा करते हैं. कहते है भगवान शंकर भी मां पार्वती के साथ अक्सर इस पर्वत पर विचरण करते रहते हैं.
जूनागढ़ है प्राकृतिक सौंदर्य का गढ़
जूनागढ़ गुजरात राज्य का प्राचीन शहर है जो प्रकृति की गोद में बसा हुआ है. यहां वेलिंगडन डेम, अलन सागर डेम हैं जो वर्षा ऋतु में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं. जूनागढ़ में दक्षिण की ओर दामोदर कुंड, अशोक का शिलालेख और इसके साथ ही गिरनार की तलहटी में भवनाथ मंदिर ( Bhavnath temple ) है, जिसके कारण इसे भवनाथ तलहटी के नाम से भी जाना जाता है. जूनागढ़ के गिरनार पर्वत पर रोप वे भी है जिसे गुजरात सरकार और श्रीमहंत हरिगिरि महाराज के प्रयासों से स्थापित किया गया है.
भवनाथ मंदिर नागा संतों का है बड़ा केंद्र
भवनाथ मंदिर ( Bhavnath temple ) प्राचीन काल से ही श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अधिपत्य में रहा है. यहां शिवरात्रि पर्व पर देश भर से लाखों नागा संत आते हैं. इस मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत हरिगिरि महाराज हैं जो श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री भी हैं. उनके निर्देशन में भवनाथ मंदिर में आने वाले भक्तों को हर समय भोजन प्रसाद मिलता रहता है. भवनाथ मंदिर में एक दिन में चार बार आरती होती है. सुबह 4.45 बजे सुबह मंगला आरती, दोपहर 11बजे भांग आरती, 7.15 बजे शाम संध्या आरती और रात 11 बजे शयन आरती होती है.
राजकोट से भवनाथ मंदिर 105 किलोमीटर, अहमदाबाद से 320 किलोमीटर है.
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