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कड़कड़ाती ठंड और लाखों की भीड़; वृंदावन के रंगनाथ मंदिर में ऐसा क्या हुआ कि थम गई सबकी नजरें?

वृंदावन के श्री रंगनाथ मंदिर में बैकुंठ एकादशी के अवसर पर बैकुंठ द्वार खोला गया है. ब्रह्म मुहूर्त में भगवान रंगनाथ और माता गोदा जी की भव्य सवारी निकली, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने मोक्ष द्वार से गुजरकर दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त किया.

रिपोर्ट- राकेश पचौरी


धर्म और आस्था की नगरी वृंदावन में मंगलवार को एक ऐसा नजारा दिखा जिसे देखने के लिए भक्त साल भर का इंतजार करते हैं. उत्तर भारत के सबसे भव्य दक्षिण शैली के मंदिर, ‘श्री रंगनाथ मंदिर’ में बैकुंठ एकादशी का पर्व बड़े ही धूमधाम और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया. इस खास मौके पर मंदिर के ‘बैकुंठ द्वार’ खोले गए, जिनसे होकर गुजरने के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी.

ब्रह्म मुहूर्त में खुली मोक्ष की राह

उत्सव की शुरुआत सोमवार देर रात भगवान रंगनाथ की ‘मंगला आरती’ के साथ हुई. लेकिन असली रौनक सुबह ब्रह्म मुहूर्त में देखने को मिली. कड़कड़ाती ठंड के बीच, दक्षिण भारतीय वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान रंगनाथ और माता गोदा जी की सवारी निज मंदिर से पालकी में सवार होकर निकली.

परंपरा के अनुसार, यह सवारी सीधे ‘बैकुंठ द्वार’ पहुंची. यहाँ करीब आधे घंटे तक विशेष पाठ और अर्चना हुई. मंदिर के श्री महंत गोवर्धन रंगाचार्य जी की मौजूदगी में पुजारियों ने कुंभ आरती की, जिसके बाद भक्तों के लिए स्वर्ग का प्रतीक माना जाने वाला यह द्वार खोल दिया गया.

क्या है इसके पीछे की मान्यता?

हिंदू धर्म में बैकुंठ एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है. मंदिर के पुजारी स्वामी राजू ने बताया कि 21 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के 11वें दिन ही यह द्वार खुलता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण भारत के आलवार संतों ने जब भगवान नारायण से पूछा था कि जीवात्मा के मोक्ष (बैकुंठ धाम) जाने का रास्ता क्या है, तब भगवान ने स्वयं इस द्वार से निकलने की लीला दिखाई थी. तभी से यह माना जाता है कि जो भी श्रद्धालु आज के दिन इस द्वार से होकर गुजरता है, उसे सीधा बैकुंठ लोक प्राप्त होता है.

इस बार मंदिर की सजावट देखने लायक थी. मंदिर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनघा श्री निवासन ने बताया कि द्वार को भव्य रूप देने के लिए दिल्ली, बेंगलुरु और वृंदावन से 1000 किलो से ज्यादा विदेशी फूल मंगाए गए थे. रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों की खुशबू के बीच जब भगवान की सवारी निकली, तो ऐसा लग रहा था मानो साक्षात बैकुंठ लोक धरती पर उतर आया हो.

भक्तों के लिए खास इंतजाम

लाखों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन पूरी तरह मुस्तैद था. सर्दी को ध्यान में रखते हुए भक्तों के लिए जगह-जगह अलाव जलाए गए थे और जमीन पर मैट बिछाई गई थी. श्रद्धालुओं के लिए चाय, दूध और हलवा प्रसाद का वितरण भी किया गया. सुरक्षा की कमान सीओ सदर संदीप सिंह और उनकी टीम ने संभाली, ताकि इतनी बड़ी भीड़ में भी दर्शन सुचारू रूप से हो सकें.

भक्तों का उत्साह ऐसा था कि वे रात से ही लाइनों में लग गए थे. लोगों का कहना था कि भगवान रंगनाथ के इस रूप के दर्शन और बैकुंठ द्वार से गुजरना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है.

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-भारत एक्सप्रेस



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