सुरुचि सिंह और कमलजीत ने दिलाया शूटिंग में गोल्ड
Asian Games 2026 में जिसका इंतजार पूरा देश कर रहा था, आखिरकार वो घड़ी आ ही गई. भारत को शूटिंग में पहला सोना मिल गया है. शुक्रवार 25 सितंबर को जापान के नागोया में चल रहे खेलों में 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में सुरुचि सिंह और कमलजीत ने मिलकर गोल्ड पर निशाना लगा दिया. ये इस एशियन गेम्स में भारत का दूसरा गोल्ड मेडल है. इससे पहले महिला क्रिकेट टीम ने देश को पहला गोल्ड दिलाया था. फाइनल में इस जोड़ी ने 484.6 का स्कोर किया जो नया एशियन रिकॉर्ड है और साउथ कोरिया को 6.6 पॉइंट के बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया.
दोनों शूटरों का हरियाणा कनेक्शन
इस जीत की सबसे खास बात ये है कि दोनों ही गोल्ड मेडलिस्ट हरियाणा से हैं. सुरुचि झज्जर जिले से आती हैं तो वहीं कमलजीत रेवाड़ी के सुलखा गांव के रहने वाले हैं. जैसे ही इन दोनों ने सोना जीता, हरियाणा में जश्न शुरू हो गया. क्वालिफिकेशन में भी इस जोड़ी ने 587 पॉइंट के साथ टॉप किया था, जिसमें 29 इनर 10 शामिल थे.
कौन हैं सुरुचि सिंह? 13 साल की उम्र से थामा था पिस्टल
सुरुचि सिंह का जन्म 28 अप्रैल 2006 को झज्जर में हुआ था. उन्होंने महज 13 साल की उम्र में शूटिंग शुरू कर दी थी. दिलचस्प बात ये है कि परिवार में पहलवानी का बैकग्राउंड होने की वजह से पहले उन्हें कुश्ती में जाने को कहा गया था, लेकिन उनका मन पिस्टल में लगा. इसके बाद उन्होंने भिवानी की गुरु द्रोणाचार्य शूटिंग अकादमी में कोच सुरेश सिंह से ट्रेनिंग लेनी शुरू की. 2025 में उन्होंने सीनियर सर्किट में धमाका कर दिया था. ब्यूनस आयर्स, लीमा और म्यूनिख में लगातार तीन ISSF वर्ल्ड कप में गोल्ड जीता. लीमा में सौरभ चौधरी के साथ मिक्स्ड टीम का भी सोना जीता था. दोहा में हुए वर्ल्ड कप फाइनल में 245.1 स्कोर करके जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किया. 2026 में भी उनका फॉर्म जारी रहा, म्यूनिख वर्ल्ड कप में फिर गोल्ड और नई दिल्ली एशियन चैंपियनशिप में सम्राट राणा के साथ सिल्वर जीता था.
कौन हैं कमलजीत? चोट के बाद एथलेटिक्स छोड़कर बने शूटर
कमलजीत का जन्म 22 अगस्त 2003 को रेवाड़ी के सुलखा गांव में हुआ. वह 10 मीटर के साथ-साथ 50 मीटर पिस्टल में भी माहिर हैं. उनका ट्रेनिंग बेस 10X शूटिंग अकादमी, सुलखा ही है. कमलजीत पहले ट्रैक एंड फील्ड एथलेटिक्स में थे, लेकिन चोट लगने के बाद उन्हें वो खेल छोड़ना पड़ा और 2019 में शूटिंग शुरू की. मिडिल क्लास फैमिली से होने की वजह से शुरू में पैसों की बड़ी दिक्कत आई. कोचिंग फीस, गोला-बारूद का खर्च निकालना मुश्किल था. एक वक्त तो ऐसा आ गया था कि उन्होंने शूटिंग छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन माता-पिता हर कदम पर साथ खड़े रहे. 2-3 साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने वापसी की. 2023 में चांगवॉन में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल में 544 स्कोर के साथ गोल्ड जीता और टीम इवेंट में भी गोल्ड अपने नाम किया. उसी साल बाकू वर्ल्ड चैंपियनशिप में टीम ब्रॉन्ज और 2025 में काहिरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में टीम सिल्वर जीता. 2026 नई दिल्ली एशियन चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल में 561 पॉइंट के साथ सिल्वर मेडल जीता था.
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निराशा से वापसी कर रचा इतिहास
ये गोल्ड इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों ही शूटर अपने इंडिविजुअल इवेंट में मेडल से चूक गए थे. कमलजीत 9वें नंबर पर रहे थे और फाइनल में नहीं पहुंच पाए थे, जबकि सुरुचि 26वें स्थान पर रही थीं. लेकिन मिक्स्ड टीम में उन्होंने आखिरी मौके को गोल्ड में बदल दिया. फाइनल में शुरुआत से ही दोनों ने लीड बनाए रखी. पहली सीरीज में 103 पॉइंट लेकर बढ़त ली और आखिरी तक कोरिया को वापसी का मौका नहीं दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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