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Commonwealth Games 2026: ग्लासगो में भारत की मेडल उम्मीदों को झटका! हटे रेसलिंग, हॉकी और बैडमिंटन जैसे बड़े खेल

Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत 125 खिलाड़ियों के साथ 8 खेलों में हिस्सा ले रहा है, लेकिन कई प्रमुख खेलों के बाहर होने से मेडल चुनौती बढ़ गई है. बर्मिंघम 2022 में भारत के 61 मेडल में से 30 मेडल ऐसे खेलों से आए थे, जो इस बार ग्लासगो में शामिल नहीं हैं.

Commonwealth Games 2026

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Commonwealth Games 2026:  ग्लासगो में शुरू हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय दल के सामने बड़ी चुनौती होगी. भारत इस बार 125 खिलाड़ियों के साथ 8 खेलों में हिस्सा ले रहा है, लेकिन कई ऐसे खेलों को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया है, जिनमें भारत का प्रदर्शन हमेशा मजबूत रहा है. इसका सीधा असर भारत की मेडल टैली पर पड़ सकता है.

बर्मिंघम 2022 में भारत ने जीते थे 61 मेडल

पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स यानी बर्मिंघम 2022 में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 61 मेडल जीते थे और मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहा था. खास बात यह है कि इनमें करीब 30 मेडल उन खेलों से आए थे, जिन्हें ग्लासगो 2026 के कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है. भारत के लिए चिंता की बात यह है कि रेसलिंग, हॉकी, बैडमिंटन और क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं हैं. इसके अलावा शूटिंग को भी लगातार दूसरी बार जगह नहीं मिली है.

कम बजट में हो रहा है ग्लासगो गेम्स का आयोजन

ग्लासगो 2026 का आयोजन पिछले संस्करणों की तुलना में काफी सीमित स्तर पर किया जा रहा है. कम खर्च में आयोजन कराने के लिए खेलों की संख्या घटाई गई है और नए निर्माण से भी बचा गया है. दरअसल, जुलाई 2023 में ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य ने बढ़ती लागत के कारण मेजबानी से हाथ पीछे खींच लिया था. अनुमानित खर्च 2.6 बिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर से बढ़कर करीब 7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था. इसके बाद ग्लासगो ने आयोजन की जिम्मेदारी संभाली.

पुराने वेन्यू और सीमित सुविधाओं के साथ आयोजन

ग्लासगो गेम्स 2026 करीब 150 मिलियन पाउंड के बजट में आयोजित किए जा रहे हैं. इस बार कोई नया स्टेडियम या खेल परिसर नहीं बनाया गया है. आयोजक 2014 में इस्तेमाल किए गए मौजूदा वेन्यू पर ही निर्भर हैं.खिलाड़ियों के लिए अलग कॉमनवेल्थ विलेज भी नहीं बनाया गया है. खिलाड़ी स्थानीय होटलों और विश्वविद्यालयों में ठहराए गए हैं. सभी प्रतियोगिताओं को चार प्रमुख वेन्यू कॉम्प्लेक्स तक सीमित रखा गया है.

भारत के लिए मेडल जीतना होगी बड़ी चुनौती

रेसलिंग, हॉकी और बैडमिंटन जैसे खेलों में भारत की पदक उम्मीदें हमेशा मजबूत रही हैं. इन खेलों की गैरमौजूदगी से भारत की मेडल संख्या पर असर पड़ सकता है. हालांकि भारतीय दल में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल हैं और कुछ खेलों के साथ पैरा स्पोर्ट्स में भी देश को पदक की उम्मीद है. ग्लासगो 2026 में भारत की चुनौती सिर्फ पदक जीतने की नहीं, बल्कि सीमित खेलों में अपना दबदबा बनाए रखने की भी होगी. अब नजरें इस बात पर होंगी कि भारतीय खिलाड़ी इन परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन करते हैं.

भारत एक्सप्रेस



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