Gurinderveer Singh National Record: भारत को अपना नया ‘उड़न सिख’ मिल गया है. राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कप के दूसरे दिन पुरुषों की 100 मीटर रेस में जो कुछ भी हुआ, उसने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ दिया है. पंजाब के सनसनीखेज धावक गुरिंदरवीर सिंह ने ट्रैक पर बिजली जैसी रफ्तार दिखाते हुए महज 10.09 सेकंड में दौड़ पूरी कर एक नया नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. इस अविश्वसनीय टाइमिंग के साथ गुरिंदरवीर 10.10 सेकंड से कम समय में 100 मीटर रेस पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं. उन्होंने इस सीजन में एशिया का दूसरा सबसे तेज समय भी दर्ज किया है.
दो बार टूटा नेशनल रिकॉर्ड
शुक्रवार को मैदान पर गुरिंदरवीर सिंह और ओडिशा के अनिमेष कुजूर के बीच ‘भारत का सबसे तेज इंसान’ बनने की जो जंग देखने को मिली, उसे एथलेटिक्स प्रेमी सालों तक याद रखेंगे. रेस से पहले अनिमेष कुजूर (10.18 सेकंड के पुराने रिकॉर्ड के साथ) जीत के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे थे.
लेकिन ड्रामा तो सेमीफाइनल में शुरू हुआ. पहली सेमीफाइनल हीट में गुरिंदरवीर ने 10.17 सेकंड का समय निकालकर अनिमेष का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया. इस बात को अभी पांच मिनट भी नहीं बीते थे कि दूसरी सेमीफाइनल हीट में अनिमेष कुजूर ने पलक झपकते ही 10.15 सेकंड की टाइमिंग के साथ अपना रिकॉर्ड वापस छीन लिया. यानी कुछ ही मिनटों के भीतर भारत का नेशनल रिकॉर्ड दो बार टूटा और बना.
दो फीट की दूरी से जीती बाजी
असली पिक्चर अभी बाकी थी. जब दोनों धावक फाइनल मुकाबले के लिए ट्रैक पर उतरे, तो माहौल में जबरदस्त तनाव था. लेकिन बंदूक की आवाज होते ही गुरिंदरवीर ने वह कर दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी. उन्होंने फाइनल रेस को सिर्फ 10.09 सेकंड में खत्म कर अनिमेष को सीधे 0.11 सेकंड से पछाड़ दिया. जब गुरिंदरवीर ने फिनिशिंग लाइन पार की, तो वह अनिमेष से करीब दो फीट आगे थे. इस रेस में रिलायंस फाउंडेशन के प्रणव गुरव 10.29 सेकंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे.
इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही गुरिंदरवीर ने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ द्वारा 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) के लिए तय किए गए 10.16 सेकंड के क्वालीफाइंग मार्क को भी आसानी से पार कर लिया है. अब पूरे एशिया में इस सीजन में उनसे आगे सिर्फ जापान के फुकुतो कोमुरो (10.08 सेकंड) हैं.
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कभी जूते खरीदने के नहीं थे पैसे
गुरिंदरवीर की यह कामयाबी जितनी चमकीली है, उनका सफर उतना ही कांटों भरा रहा है. दो साल पहले दिए गए अपने एक इंटरव्यू को याद करते हुए गुरिंदरवीर ने बताया था कि एक वक्त ऐसा भी था जब उनके पास आगे बढ़ने के साधन नहीं थे.
उन्होंने भावुक होते हुए कहा था, “जब मुझे अच्छे रनिंग शूज या फूड सप्लीमेंट्स की जरूरत होती थी, तो मेरे कोच साहब अपनी जेब से पैसे लगाकर मुझे वो चीजें दिलाते थे. यहां तक कि जब मेरे पास प्रतियोगिताओं में जाने के लिए बस या ट्रेन के पैसे नहीं होते थे, तब मेरे गांव और समुदाय के लोगों ने चंदा इकट्ठा करके मेरी मदद की थी.”
आज उन्हीं लोगों की दुआओं और गुरिंदरवीर की दिन-रात की मेहनत का नतीजा है कि पूरा देश उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी पर गर्व कर रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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