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हॉकी के जादूगर को पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, बोले- मेजर ध्यानचंद की उत्कृष्टता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी

मेजर ध्यानचंद (Major Dhayanchand) का जन्म 29 अगस्त सन् 1905 को इलाहाबाद मे हुआ था. मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है.

Major Dhayanchand

राष्ट्रीय खेल दिवस की पीएम मोदी ने दी बधाई.

हॉकी के जादूगर के नाम से मशहूर मेजर ध्यानचंद (Major Dhayanchand) की जयंती पर आज (29 अगस्त) राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जा रहा है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा, “मेजर ध्यानचंद की उत्कृष्टता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी.”

Major Dhayanchand को दी श्रद्धांजलि

पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- “राष्ट्रीय खेल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! इस विशेष अवसर पर, हम मेजर ध्यानचंद जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिनकी उत्कृष्टता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी.”

उन्होंने आगे लिखा, “पिछले एक दशक में, भारत के खेल परिदृश्य में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है. युवा प्रतिभाओं को निखारने वाले जमीनी स्तर के कार्यक्रमों से लेकर विश्वस्तरीय सुविधाओं के निर्माण तक, हम अपने देश में एक जीवंत खेल पारिस्थितिकी तंत्र देख रहे हैं. हमारी सरकार एथलीटों का समर्थन करने, बुनियादी ढांचे के निर्माण और भारत को खेल उत्कृष्टता का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.”

इलाबाद में हुआ था ध्यानचंद का जन्म

मेजर ध्यानचंद (Major Dhayanchand) का जन्म 29 अगस्त सन् 1905 को इलाहाबाद मे हुआ था. मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है. उन्होंने अपने खेल जीवन में 1000 से अधिक गोल दागे. जब वो मैदान में खेलने को उतरते थे तो गेंद मानों उनकी हॉकी स्टिक से चिपक सी जाती थी. उन्हें 1956 में भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था.

साधारण शिक्षा प्राप्त करने के बाद 16 वर्ष की उम्र में साल 1922 में वह दिल्ली में प्रथम ब्राह्मण रेजीमेंट में सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हो गए. जब ‘फर्स्ट ब्राह्मण रेजीमेंट’ में भर्ती हुए, उस समय तक उनके मन में हॉकी के प्रति कोई विशेष दिलचस्पी या रूचि नहीं थी.

यह भी पढ़ें- मेजर ध्यानचंद : हॉकी के जादूगर, जिन्होंने ठुकरा दिया था हिटलर का ऑफर

ध्यानचंद को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित करने का श्रेय रेजीमेंट के एक सूबेदार मेजर तिवारी जाता है. मेजर तिवारी खुद हॉकी प्रेमी और खिलाड़ी थे. उनकी देख-रेख में ध्यानचंद हॉकी खेलने लगे, देखते ही देखते वह दुनिया के एक महान खिलाड़ी बन गए.

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-भारत एक्सप्रेस



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