जानिए कौन थे ‘मेरे भारत के कंठहार’ गीत को अमर करने वाले सत्यनारायण, जिन्होंने रची थी बिहार की पहचान
बिहार की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को अपनी लेखनी से स्वर देने वाले वरिष्ठ कवि-गीतकार सत्यनारायण अब सिर्फ यादों में रह गए हैं. 13 सितंबर 1935 को भोजपुर जिले (तत्कालीन शाहाबाद) के कौलोडिहरी गांव में जन्मे कवि शिरोमणि सत्यनारायण कदमकुआं के घर की चहारदीवारी में पड़े-पड़े अकुलाता उनका मन सदा-सदा के लिए आजाद हो गया.
राज दरभंगा से लेकर हथुआ और डुमरांव तक… आखिर कैसे बिहार के ऐतिहासिक घरानों की पुश्तैनी दुर्गा पूजा खींच लाती है लोगों को अपनी जड़ों की ओर?
बिहार में दुर्गा पूजा सिर्फ भव्य पंडालों और उत्सव का नाम नहीं है. पुराने जमींदार घरानों के लिए यह अपनी पुश्तैनी जड़ों, कुलदेवी और सदियों पुरानी परंपराओं से दोबारा जुड़ने का मौका भी है.
PM Modi in Trinidad: भारत की मिट्टी से निकली PM, Buxar से त्रिनिदाद तक की कहानी
त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधान मंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर की जड़ें बिहार के बक्सर जिले के भेलूपुर गांव में हैं। उनके परदादा राम लखन मिश्रा 1889 में एक गिरमिटिया मजदूर के रूप में प्रवास पर आये थे, और फिर वो वहीं के होकर रह गए. इसके अलावा आपको बता दें कि जब कमला प्रसाद-बिसेसर 2012 में पहली बार त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधान मंत्री बनी थी तब वे यहां अपने परिजनों से मिलने आईं थीं।उन्होंने रिश्तेदारों को गले लगाते हुए कहा: "बिहार मेरे डीएनए में है।" ऐसे में भारत एकस्प्रैस के संवाददाता प्रशांत राय कमला प्रसाद बिसेसर के पैतृक गांव भेलूपुर पहुंचे है. देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट...





