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BLO deaths

उत्तर प्रदेश में चुनावी कामकाज के दौरान बीएलओ पर बढ़ते काम के बोझ और तनाव ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। कई बीएलओ भारी दबाव के कारण जान गंवा रहे हैं या नौकरी छोड़ने पर मजबूर हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार और चुनाव आयोग पर अव्यवहारिक एसआईआर लक्ष्यों को थोपने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह काम अब मानसिक प्रताड़ना बन चुका है। अखिलेश ने मृतक बीएलओ के परिवारों को पार्टी फंड से 2-2 लाख रुपये देने की घोषणा भी की है। सवाल यह है—क्या सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान देगी?

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुड्डुचेरी में चल रहे एसआईआर (Special Summary Revision) मामलों की सुनवाई के दौरान बीएलओ (BLO) की मौत पर गंभीर चिंता जताई. पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत को बताया कि अब तक 23 बीएलओ की मृत्यु हो चुकी है.

चुनाव आयोग ने 4 नवंबर से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी (SIR) की शुरुआत वोटर लिस्ट छांटने के लिए की थी. लेकिन कौन जानता था कि ये प्रक्रिया इसमें लगे BLO की मौत की वजह बनेगा. राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल में कुछ BLO खुदकुशी कर रहे हैं, तो किसी की हार्ट अटैक से मौत हो जा रही है. BLO की मौतों का मामला इतना बढ़ गया है कि इसने सियासी संग्राम का रूप ले लिया. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को मौतों का जिम्मेदार ठहराया. इसको लेकर हम समझते हैं कि SIR की वजह से BLO की मौतों का मामला क्या है, और इस पर सियासी जंग कैसे छिड़ी है और इसका अंजाम क्या होगा.