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उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया में भारत का गौरव बढ़ रहा है. कांग्रेस के शासन के दौरान, विदेशों में लोग कहते थे कि भारत एक कमजोर देश है.

BSP: मायावती ने चुनाव में जो रणनीति बनाई है उसमें उन्होंने यूपी से सटे जिले शामिल किए हैं. मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल बुंदेलखंड और विंध्य वह इलाका है, जो यूपी की सीमा से जुड़ा हुआ है.

BSP ने इससे पहले 17 अक्टूबर को मध्य प्रदेश चुनाव के लिए पांचवी लिस्ट जारी की थी, जिसमें 5 उम्मीदवारों के नाम शामिल थे.

कांशीराम के 9 अक्टूबर को होने वाले परिनिर्वाण दिवस पर नोएडा के साथ ही प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता शामिल होंगे.

1990 के विधानसभा चुनाव के दौरान मायावती की पार्टी ने पहली बार मध्य प्रदेश में एंट्री ली. तब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ एक ही हुआ करते थे.

विपक्षी दलों के गठबंधन 'INDIA' से मायावती ने दूरी बना रखी है. अब दानिश अली की राहुल गांधी और अजय राय से मुलाकात के बाद कयास लगाया जा रहा है कि वो जल्द ही बसपा का दामन छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लेंगे.

बसपा ने ऐसा फैसला लिया है कि उसके बाद एनडीए और इंडिया खेमे पक्ष के नेता दलित वोटरों को अपने पाले में लाने की जुगत में भिड़ गए हैं. अगर वाकई में बसपा के वोटर्स नोटा का इस्‍तेमाल करते हैं तो चुनाव परिणाम की तस्‍वीर बदली-बदली सी नजर आएगी.

BSP Supremo Mayawati political strategy: सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की कई बार मुख्यमंत्री रह चुकीं बसपा सुप्रीमो मायावती को लगता है कि इस बार लोकसभा चुनाव समय से पहले कराए जा सकते हैं. ऐसे में वे अभी से अपनी तैयारी में जुट गई हैं. वे किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं होंगी, उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी.

विपक्षी गठबंधन इंडिया की 31 अगस्त और 1 सितंबर को मुंबई में बैठक हो रही है, इसमें मायावती के शामिल होने के चर्चे खूब हो रहे थे, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस बैठक में हिस्सा नहीं ले रही हैं.

बसपा से निकाले जाने के बाद इमरान मसूद ने कहा कि वह सभी से राय लेंगे और फिर कांग्रेस में जाने का निर्णय लेंगे व राहुल गांधी के साथ मिलकर भाजपा को उखाड़ फेकेंगे.