जब कॉर्पोरेट की रफ्तार के बीच अचानक याद आ जाए पटना! जानिए कैसी है रणि की यह खास किताब
इंसान चाहे अपने शहर से कितनी भी दूर चला जाए, उसकी यादें कभी उससे दूर नहीं होतीं. वक्त के साथ शहर बदल जाते हैं, घर छूट जाते हैं और जिंदगी नई राहों पर चल पड़ती है, लेकिन बचपन की गलियां, पुराने दोस्त, चाय-पान की दुकानें और अपनों की आवाजें दिल के किसी कोने में हमेशा जिंदा रहती हैं.







