19 वर्ष की आयु में पूर्ण किया शुक्ल यजुर्वेद का दुर्लभ ‘दण्डकर्म पारायणम्’
भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की प्राचीन परम्पराएं आज भी पूर्ण रूप से जीवंत हैं. वाराणसी (काशी) के बाल-वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने इसे सिद्ध कर दिखाया है.

भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की प्राचीन परम्पराएं आज भी पूर्ण रूप से जीवंत हैं. वाराणसी (काशी) के बाल-वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने इसे सिद्ध कर दिखाया है.