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दिल्ली वक्फ बोर्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान को राऊज एवेन्यू कोर्ट से राहत मिली है.

जांच एजेंसियों का आरोप है कि बोर्ड के अध्यक्ष रहते हुए अमानतुल्लाह खान ने सरकारी नियमों और दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए नियुक्तियां कीं और इसके बदले अवैध रूप से धन लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली वक्फ बोर्ड की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें शाहदरा स्थित गुरुद्वारे की जमीन को वक्फ संपत्ति बताकर मस्जिद होने का दावा किया गया था.

याचिका में अश्विनी कुमार पर कानूनी अधिकारी के बिना सार्वजनिक पद हड़पने का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता जमीर अहमद जुमलाना ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि अश्विनी कुमार को वक्फ बोर्ड प्रशासक के तौर पर नियुक्ति से रोका जाए.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा प्रकाशित पुस्तक "वक्फ बिल 2024: रिस्पेक्ट फॉर इस्लाम एंड गिफ्ट फॉर मुस्लिम" ने न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश में बहस और विचार-विमर्श का एक नया दौर शुरू कर दिया है.

Delhi Waqf Board Case: दिल्ली वक्फ बोर्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित आरोपी और आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान द्वारा जमा की गई एफडी को सत्यापित करने के लिए राउज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी को समय दे दिया है.

कोर्ट 14 नवंबर को अपना फैसला सुनाएगा. ईडी (ED) की ओर से दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आम आदमी पार्टी के नेता और ओखला से विधायक अमानतुल्लाह खान और मरियम सिद्दीकी का नाम है.

ED के अनुसार, यह मामला दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को गैर कानूनी रूप से पट्टे पर देने और कर्मचारियों की अवैध भर्ती के माध्यम से व्यक्तिगत लाभ हासिल करने से संबंधित है.

अमानतुल्लाह खान से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दो प्राथमिकी से जुड़ा है. एक प्राथमिकी वक्फ बोर्ड में अनियमितताओ से संबंधित सीबीआई से जुड़ी हुई है. जबकि दूसरी दिल्ली एसीबी द्वारा आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले से संबंधित है.

ईडी का आरोप है कि दिल्ली वक्फ बोर्ड में कर्मचारियों की अवैध भर्ती हुई और अमानतुल्लाह खान के अध्यक्ष रहने के दौरान वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को गलत तरीके से पट्टे पर देकर अवैध व्यक्तिगत लाभ कमाया गया.