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अध्ययन को लेकर शोधकर्ताओं ने कहा है कि एक दशक पहले पहचाने गए जलवायु टिपिंग प्वाइंट्स में से आधे से अधिक अब सक्रिय हो गए हैं.

यूरेनस साल 1781 में खगोलशास्त्री विलियम हर्शेल ने खोजा था. हालांकि उन्होंने शुरू में सोचा था कि यह या तो धूमकेतु है या फिर तारा. दो साल बाद खगोलशास्त्री जोहान एलर्ट बोडे के रिसर्च के बाद इसे एक नए ग्रह के रूप में स्वीकार किया गया था.

Days Getting Longer On Earth: वैज्ञानिकों ने ग्लेशियल आइसोस्टैटिक एडजस्टमेंट के प्रभाव को मापा है.

अगर सैटेलाइट हाई ऑर्बिट में है तो वैज्ञानिक उसे स्पेस में ही और आगे भेज देते हैं, ताकि वो धरती के ऑर्बिट से दूर हो जाए.

ब्रह्मांड के तमाम रहस्यों से अब तक पर्दा नहीं उठ सका है. हालांकि वैज्ञानिकों की खोज ने तमाम तथ्यों को हमारे सामने भी रखा है. हम आपको ब्रह्मांड से जुड़े कुछ ऐसे ही तथ्यों से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्हें जानकर आपका दिमाग हिल जाएगा.

मई की शुरूआत में चीन ने अपना चैंग'ई-6 मिशन लॉन्च किया था. उसका मकसद चांद के सबसे दूर वाले हिस्से (जहां अंधेरा होता है) पर जाकर सैंपल इकट्ठे करके वापस धरती पर लाना था, वो मिशन 53 दिन बाद पूरा हो गया है.

महासागर खतरे में हैं, इसके पीछे ग्लोबल वार्मिंग तो एक कारण ही है, जबकि अत्यधिक मछलियों का दोहन, समुद्र में खनन, तटों पर अंधाधुंध विकास, प्रदूषण और प्लास्टिक अपशिष्ट जैसी समस्याएं महासागरों के परिस्थिति तंत्र को बिगाड़ रही हैं.

एडवेंचर में यकीन रखने वाले कुछ ट्रेवलर्स खतरनाक से खतरनाक जगह जाने से भी नहीं हिचकते लेकिन आज हम आपको 5 ऐसे खतरनाक जगहों के बारे में बताने वाले हैं, जहां जाने का मतलब है वापस लौटकर नहीं आना.

यूं तो पृथ्वी के 70% से ज्यादा हिस्से पर जलवायु है, महज 30% भूमि है..मगर इसके बावजूद इसी दुनिया में लाखों-करोड़ों लोग पेयजल को तरसते हैं. समुद्र में कचरा बहुत हो गया है. स्वच्छ जल के लिए जरूरी है नदियाँ साफ की जाएं, इसीलिए शुरू हुई खास पहल —

Aditya L1 Mission: इसरो ने कहा कि एल1 बिंदु के चारों ओर प्रभामंडल कक्षा में स्थापित उपग्रह से सूर्य पर लगातार नजर रखने में बड़ा फायदा होगा और कोई भी ग्रह इसमें बाधा नहीं डालेगा.