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Indian Economy: भारत की वृद्धि की कहानी सशक्त सुधारों, डिजिटल नवाचार, हरित पहलों और मजबूत बुनियादी ढांचे द्वारा प्रेरित है, जिससे भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रमुख स्थान मिला है.

11 जुलाई, 2024 को जुटाया गया STT 16,634 करोड़ रुपये था. यह 10 अक्टूबर को 30,630 करोड़ रुपये, 10 नवंबर को 35,923 करोड़ रुपये और 17 दिसंबर को 40,114 करोड़ रुपये हो गया.

ऋण श्रेणी के अंतर्गत भारतीय कंपनियों द्वारा OFDI 2024 में 8.7 अरब डॉलर था, जबकि पिछले कैलेंडर वर्ष में यह 4.76 अरब डॉलर था. घरेलू फर्मों द्वारा जारी गारंटी 2023 में 18.44 अरब डॉलर के मुकाबले 2024 में घटकर 16.29 अरब डॉलर रह गई.

महाकुंभ के आयोजन से प्रयागराज के व्यापार और अर्थव्यवस्था में भारी बढ़ोतरी हुई है. होटल पर्यटन इंडस्ट्री हो या खान-पान के सामान, ऊनी कपड़े, कम्बल, रजाई, गद्दों के साथ इलेक्ट्रॉनिक समानों की बिक्री में भी 30 से 40% की वृद्धि हुई है.

World Economic Forum की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक आर्थिक स्थिति कमजोर रहने का अनुमान है, लेकिन भारत अपनी मजबूत वृद्धि को बनाए रखेगा, हालांकि गति में थोड़ी कमी हो सकती है.

Economic Transformation : भारत को भविष्य के कामकाजी कौशलों के क्षेत्र में अमेरिका के बाद दूसरी रैंक प्राप्त हुई है. देश की स्किलिंग पहल ने इसे नए तकनीकी कौशल के लिए तैयार किया है.

भारत में स्टार्टअप की संख्या 2014 में मात्र 400 थी, जो आज बढ़कर 1,57,000 हो गई है. 'स्टार्टअप इंडिया' पहल ने इस बदलाव को संभव बनाया, जिससे देश में रोजगार के अवसर बढ़े और नये उद्योगों का निर्माण हुआ.

इंडस्ट्रियल बॉडी पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) ने चालू वित्त वर्ष में देश की GDP 6.8 प्रतिशत और वित्त वर्ष 26 में 7.7 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान लगाया है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, "DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 2016 में लगभग 500 से बढ़कर 15 जनवरी, 2025 तक 1,59,157 हो गई है. 31 अक्टूबर, 2024 तक कुल 73,151 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक शामिल हैं."

Franklin Templeton का कहना है कि अगले चार तिमाहियों में भारत की आर्थिक वृद्धि औसतन 7% से ऊपर रह सकती है. ऐसा सरकार की नीतियों और घरेलू मांग के कारण होगा.