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Fact

बचपन से हम सब 'मगरमच्छ के आंसू' मुहावरे का इस्तेमाल करते आ रहे हैं, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान बेहद दिलचस्प है. असल में मगरमच्छ किसी दुख या पछतावे में नहीं रोता बल्कि शिकार को निगलते समय उसके जबड़ों के दबाव के कारण आंसू ग्रंथियां एक्टिव हो जाती हैं.

International Mountain Day 2024: हर साल 11 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय पर्वतीय दिवस मनाया जाता है, इसका उद्देश्य पर्वतों के महत्व को उजागर करना और पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है.