Do You Know: बचपन से हम सबने एक मुहावरा खूब सुना है ‘मगरमच्छ के आंसू मत बहाओ’. जब भी कोई इंसान दिखावे के लिए झूठा दुख जताता है तो लोग तुरंत इस मुहावरे का इस्तेमाल कर देते हैं. बरसों से यह कहानी चली आ रही है कि मगरमच्छ जब अपने शिकार को खाता है तो उसे बड़ा पछतावा होता है और वह दुख में रोने लगता है. लेकिन क्या सच में ऐसा है? विज्ञान की मानें तो कहानी बिल्कुल उलट है. मगरमच्छ के रोने का उसकी भावनाओं दुख या पछतावे से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है बल्कि यह उसके शरीर की एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है.
क्यों आते हैं मगरमच्छ की आंखों में आंसू?
वैज्ञानिकों के मुताबिक मगरमच्छ इंसानों की तरह इमोशनल होकर नहीं रोता. असल में जब यह किसी बड़े शिकार को दबोचता है और उसे निगलने की कोशिश करता है तो उसके भारी-भरकम जबड़ों की मांसपेशियों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है. यह दबाव इतना तेज होता है कि उसकी आंखों के पास मौजूद आंसू ग्रंथियों को दबा देता है. नतीजतन वहां से एक लिक्विड या तरल पदार्थ बाहर निकल आता है. लोगों को लगता है कि मगरमच्छ रो रहा है जबकि वह बस अपना खाना अंदर गटकने की मेहनत में लगा होता है.
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मगरमच्छ की एक दिलचस्प कमजोरी
आपको जानकर हैरानी होगी कि मगरमच्छ के जो जबड़े बंद होते समय किसी की भी हड्डी तोड़ सकते हैं उन्हें खोलने वाली मांसपेशियां बेहद कमजोर होती हैं. यही वजह है कि रेस्क्यू करने वाले एक्सपर्ट्स कई बार इसके मुंह को मजबूत टेप या रस्सी से आसानी से बांध देते हैं. हालांकि यह काम बेहद जोखिम भरा होता है और आम लोगों को इससे कोसों दूर रहना चाहिए.
इसके अलावा मगरमच्छ का मेटाबॉलिज्म बहुत धीमा होता है. यही वजह है कि एक बार भरपेट शिकार करने के बाद यह कई दिनों या हफ्तों तक बिना कुछ खाए-पिए मजे से जिंदा रह सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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